36.5 C
Jabalpur
May 9, 2026
सी टाइम्स
हेल्थ एंड साइंस

थैलेसीमिया से बचने के लिए शादी से पहले जांच और गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग जरूरी



गांधीनगर/अहमदाबाद, 8 मई )। विश्व थैलेसीमिया दिवस पर शुक्रवार को गुजरात में बीमारी की स्क्रीनिंग और एडवांस्ड इलाज सेवाओं के विस्तार पर जानकारी दी गई।

अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल ने इस मौके पर अपने इंटीग्रेटेड अप्रोच को सामने रखा, जिसमें मरीजों के लिए रोकथाम, जांच और लंबे समय तक चलने वाली देखभाल को एक साथ जोड़ा गया है।

अधिकारियों ने यह भी दोहराया कि शादी से पहले थैलेसीमिया जांच, गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग और परिवार आधारित जांच जैसे कदम इस बीमारी की रोकथाम के लिए जरूरी हैं, क्योंकि यह एक आनुवंशिक रोग है जो पीढ़ियों में आगे बढ़ सकता है।

हॉस्पिटल ने बताया कि उसके प्रयास ग्लोबल थीम “हिडेन नो मोर: फाइंडिंग द अनडायग्‍नोज, सर्पोटिंग द अनसीन” के मुताबिक हैं, जिसका उद्देश्य समय रहते बीमारी की पहचान करना और सभी मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि उनका मुख्य ध्यान संस्थागत देखभाल और जागरूकता अभियानों के जरिए ‘थैलेसीमिया-मुक्त गुजरात’ बनाने पर है।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार इसी लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘थैलेसीमिया-मुक्त गुजरात’ बनाने के पक्के इरादे के साथ आगे बढ़ रही है। सिविल हॉस्पिटल जैसी संस्थाओं द्वारा दिए जा रहे आधुनिक इलाज और जागरूकता अभियान इस दिशा में बहुत अहम योगदान दे रहे हैं।

अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल में मेडिकल विशेषज्ञों ने बताया कि थैलेसीमिया के मरीजों के लिए इलाज की सुविधाओं को काफी बेहतर बनाया गया है, खासकर उन बच्चों के लिए जिन्हें नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।

मेडिकल सुपरिटेंडेंट राकेश जोशी ने बताया कि हॉस्पिटल, बीजे मेडिकल कॉलेज के साथ मिलकर, मुफ्त और पूरी देखभाल की सुविधा देता है।

उन्होंने कहा कि गुजरात में ल्यूकोडीप्लीटेड ब्लड ट्रांसफ्यूजन और कीलेशन थेरेपी जैसी एडवांस्ड सेवाएं शुरू करने में सिविल हॉस्पिटल सबसे आगे रहा है।

बच्चों के विभाग की प्रमुख जॉली वैष्णव ने बताया कि थैलेसीमिया खून से जुड़ी एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इस वजह से मरीजों को जिंदा रहने के लिए नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।

उन्होंने बताया, “अभी हॉस्पिटल में हर मंगलवार और गुरुवार को लगभग 81 बच्चों को खून चढ़ाने की सुविधा दी जाती है। खून चढ़ाने से होने वाली दिक्कतों, जैसे कि बुखार और दूसरी खराब प्रतिक्रियाओं को कम करने के लिए ‘ल्यूकोडीप्लीटेड पैक्ड सेल वॉल्यूम’ का इस्तेमाल किया जाता है। हॉस्पिटल ने अपनी जांच और लंबे समय तक निगरानी रखने के सिस्टम को भी और बढ़ाया है।

इसमें मरीजों और उनके परिवार वालों की सही जांच के लिए ‘हाई-परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी’ (एचपीएलसी) पर आधारित टेस्ट शामिल हैं। इसके साथ ही, सीरम फेरिटिन लेवल, 2डी इकोकार्डियोग्राफी और आंखों व कानों की जांच के ज़रिए नियमित निगरानी भी की जाती है। बार-बार खून चढ़ाने से होने वाले आयरन ओवरलोड को कंट्रोल करने के लिए मुफ्त दवाएं दी जा रही हैं।

मरीजों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बारे में काउंसलिंग और गाइडेंस भी दी जाती है, जिसे एक संभावित इलाज के तौर पर देखा जाता है। टारगेटेड स्क्रीनिंग प्रोग्राम के ज़रिए रोकथाम के प्रयासों को बढ़ाया गया है।

इम्यूनो हीमेटोलॉजी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन डिपार्टमेंट की हेड निधि भटनागर ने कहा कि कम्युनिटी में जागरूकता बढ़ाने और बीमारी का जल्दी पता लगाने के लिए शुरू की गई एक खास पहल के तहत लगभग 5,000 हेल्थकेयर वर्कर्स की स्क्रीनिंग की जाएगी।

अधिकारियों ने रोकथाम के उपायों को भी दोहराया, जिनमें शादी से पहले थैलेसीमिया की जांच, एचपीएलसी के जरिए कैरियर स्क्रीनिंग, डॉक्टरों की सलाह पर प्रेग्नेंसी के दौरान एंटीनेटल स्क्रीनिंग, और जरूरत पड़ने पर परिवार की स्क्रीनिंग शामिल है।

अन्य ख़बरें

यूपी में लापरवाह डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई, पांच चिकित्साधिकारी बर्खास्त

Newsdesk

क्रूज शिप पर हंटावायरस संक्रमण के बाद भारत सरकार अलर्ट, निगरानी बढ़ाई गई

Newsdesk

पीरियड्स में पेट की ऐंठन और सूजन को दूर करने में कारगर यह ‘चाय

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading