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Jabalpur
May 9, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

सिकिलसेल एवं थैलेसीमिया मरीजों को लेकर मेडिकल में हुई सीएमईमरीजों को मिला विशेषज्ञों से उपचार व परामर्श


एचएलए की भी हुई जांच
जबलपुर। विश्व थैलेसीमिया दिवस 2026 के अवसर पर शनिवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया एवं सिकिलसेल जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता अभियान, सतत चिकित्सा शिक्षा सीएमई एवं नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन थैलेसीमिया जनजागरण समिति मध्यप्रदेश, थैलेसीमिया सिकिलसेल जनजागरण समिति एवं मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं अतिथियों द्वारा किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में मरीज, अभिभावक, मेडिकल छात्र, चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान मरीजों को आधुनिक उपचार, समय पर जांच एवं रोग से बचाव संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इस दौरान नोवो नॉर्डिस्क पराग सागर फ ाउंडेशन एवं पूर्णायु फ ाउंडेशन का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ

जांच शिविर में मरीजों को मिली कई सुविधाएं:-
:- शिविर में नि:शुल्क एचएलए जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
:- विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श दिया गया।
:- मरीजों एवं परिजनों की काउंसलिंग की गई।
:- रक्त संबंधी जांच एवं रोग की स्थिति का मूल्यांकन किया गया।
:- मरीजों को नियमित उपचार एवं सावधानियों की जानकारी दी गई।
:- बच्चों एवं युवाओं में बीमारी की समय पर पहचान पर जोर दिया गया।
:- शिविर में पहुंचे मरीजों एवं उनके परिजनों ने विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे चर्चा कर उपचार संबंधी जानकारी प्राप्त की।

सीएमई सत्र में आधुनिक उपचार पर हुई चर्चा:-
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा सीएमई सत्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने थैलेसीमिया एवं सिकिलसेल रोग के आधुनिक उपचार, प्रबंधन एवं रोकथाम पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर स्क्रीनिंग एवं जागरूकता से इन बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है।

सीएमई सत्र में इन विषयों पर हुई विशेष चर्चा:-
:- थैलेसीमिया एवं सिकिलसेल की नई उपचार पद्धतियां।
:- बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं एचएलए जांच का महत्व।
:- मरीजों की मानसिक एवं सामाजिक काउंसलिंग।
:- गर्भावस्था के दौरान जांच एवं रोकथाम।
:- बच्चों में शुरुआती लक्षणों की पहचान।
:- नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन एवं देखभाल की आवश्यकता।
:- विशेषज्ञों ने केस स्टडी एवं प्रेजेंटेशन के माध्यम से चिकित्सकों को व्यावहारिक जानकारी भी दी।

इन विशेषज्ञ चिकित्सकों की रही सहभागिता:-
कार्यक्रम में डॉ रूबी खान भोपाल एनएचएम, विनीता श्रीवास्तव दिल्ली एनएचएम ऑनलाइन, सीएमएचओ डॉ नवीन कोठारी, डॉ नवनीत सक्सेना, डॉ श्वेता पाठक, डॉ शरद जैन, डॉ मोनिका लाजरास, डॉ विकेश अग्रवाल, डॉ रानू मिश्रा, डॉ रविन्द्र विश्नोई, डॉ अमरदीप सिंह बंसल, डॉ शिशिर चिनपुरिया, डॉ रविन्द्र छाबड़ा आईसीएमआर एवं डॉ बी के यादव, डॉ के के वर्मा सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक, चिकित्सा अधिकारी एवं मेडिकल स्टाफ  मौजूद रहा।

जनजागरूकता बढ़ाने दिया संदेश:-
आयोजकों ने कहा कि थैलेसीमिया एवं सिकिलसेल जैसी बीमारियां अनुवांशिक होती हैं, इसलिए समय पर जांच, जागरूकता एवं सही परामर्श बेहद जरूरी है। कार्यक्रम के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाने एवं मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। साथ ही लोगों से विवाह पूर्व एवं गर्भावस्था के दौरान आवश्यक जांच कराने की अपील भी की गई।

आयुष्मान कार्ड से निजी अस्पतालों में भी होता है उपचार:-
नेशनल हेल्थ अथॉरिटी दिल्ली पॉलिसी मेकर विनीता श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के दौरान आयुष्मान भारत योजना के तहत सिकिलसेल एवं थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों को मिलने वाली उपचार सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र मरीजों को विभिन्न सरकारी एवं चिन्हित अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार, जांच एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकता है। उन्होंने बताया कि गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में भर्ती, रक्त संबंधी जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक उपचार सुविधाओं को योजना से जोडऩे की प्रक्रिया भी समझाई गई। इस दौरान मरीजों एवं उनके अभिभावकों को आयुष्मान कार्ड बनवाने, दस्तावेजों की प्रक्रिया एवं पात्रता संबंधी जानकारी दी गई। विनीता श्रीवास्तव ने डिजिटल हेल्थ सेवाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आभा आईडी की उपयोगिता भी बताई। उन्होंने कहा कि आभा आईडी के माध्यम से मरीजों का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे भविष्य में उपचार के दौरान डॉक्टरों को मरीज की स्वास्थ्य जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को आभा आईडी बनाने की प्रक्रिया, उसके लाभ एवं डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जुडऩे के तरीकों की जानकारी भी दी गई।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट बीमारी से देता स्थायी राहत:-
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ श्वेता पाठक ने थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों के उपचार में बोन मैरो ट्रांसप्लांट बीएमटी को एक प्रभावी और स्थायी उपचार विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रक्त रोग है, जिसमें बच्चों के शरीर में पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ रक्त नहीं बन पाता और उन्हें बार.बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है, ऐसे में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के माध्यम से मरीज के खराब बोन मैरो को स्वस्थ डोनर के बोन मैरो से बदलकर बच्चे को इस गंभीर बीमारी से स्थायी राहत दिलाई जा सकती है। उन्होंने जानकारी दी कि बीएमटी के लिए सबसे उपयुक्त डोनर मरीज का सगा भाई या बहन होता है, जिसका एचएलए मैच पूरी तरह मेल खाता हो, सही समय पर ट्रांसप्लांट कराने से बच्चों का जीवन सामान्य हो सकता है तथा बार.बार रक्त चढ़ाने और आयरन बढऩे जैसी समस्याओं से बचाव संभव है। डॉ पाठक ने बताया कि वर्तमान समय में चिकित्सा विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है और जीन थैरेपी जैसी आधुनिक तकनीकें भी थैलेसीमिया के उपचार में नई उम्मीद बनकर सामने आई हैं। जीन थैरेपी के माध्यम से मरीज के शरीर में मौजूद खराब जीन को सुधारने या बदलने का प्रयास किया जाता हैए जिससे शरीर स्वयं स्वस्थ रक्त बनाना शुरू कर सके। उन्होंने कहा कि जीन थैरेपी भविष्य की अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धति हैए जो थैलेसीमिया सहित कई अनुवांशिक बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि यह उपचार अभी अत्यधिक महंगा है और चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में ही उपलब्ध है, लेकिन आने वाले समय में यह तकनीक अधिक सुलभ होने की संभावना है। डॉ श्वेता पाठक ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की समय.समय पर जांच कराएंए विवाह पूर्व एवं गर्भावस्था के दौरान थैलेसीमिया स्क्रीनिंग अवश्य कराएं तथा जागरूकता बढ़ाकर इस बीमारी की रोकथाम में सहयोग करें।

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