33.7 C
Jabalpur
May 21, 2026
सी टाइम्स
जीवनशैलीराष्ट्रीयहेल्थ एंड साइंस

मुंह के कैंसर का जल्द पता लगाने के लिए केरल की विशेष पहल, ‘कैनवीन’ के तहत राजव्यापी डेंटल नेटवर्क शुरू

कोच्चि, 20 मई । केरल में मुंह के कैंसर का शुरुआती दौर में पता लगाने की प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्यव्यापी स्तर पर एक बड़ी पहल शुरू की गई है। इस पहल में दंत चिकित्सक, कैंसर विशेषज्ञ और स्वास्थ्य सेवा संस्थान एक साथ आए हैं। इसे राज्य में सामुदायिक स्तर पर मुंह के कैंसर की निगरानी के सबसे बड़े प्रयासों में से एक बताया जा रहा है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यह कार्यक्रम ‘कैनवीन’ के तहत चलाया जा रहा है। यह एक पहल है, जिसकी अगुवाई इंडियन डेंटल एसोसिएशन कर रहा है। इसमें वीपीएस लेकशोर हॉस्पिटल, चिट्टिलापिल्ली फाउंडेशन और अन्य हेल्थकेयर पार्टनर सहयोग दे रहे हैं। इस पहल का मुख्य केंद्र ‘मौखिक घाव निगरानी कार्यक्रम’ (ओएलएसपी) है।

इसका मकसद केरल भर में लगभग 6,500 डेंटल क्लीनिकों को एक व्यवस्थित स्क्रीनिंग, डॉक्यूमेंटेशन और रेफरल सिस्टम के जरिए मुंह के कैंसर का शुरुआती दौर में पता लगाने वाले केंद्रों में बदलना है। डॉ. ईपेन थॉमस ने कहा, “भारत में मुंह का कैंसर आज भी जन-स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है, क्योंकि कई मरीज विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास तब पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। यह पहल शुरुआती दौर में ही बीमारी का पता लगाने और सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने पर जोर देती है।” राष्ट्रीय कैंसर अनुमानों के मुताबिक, भारत में रिपोर्ट किए गए सभी कैंसर मामलों में से लगभग 30 प्रतिशत मामले मुंह के कैंसर के होते हैं। इनमें से 70 प्रतिशत से ज्यादा मामलों का पता तब चलता है, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर शुरुआती दौर में ही बीमारी का पता चल जाए, तो मरीजों के बचने की संभावना और इलाज के नतीजों में काफी सुधार हो सकता है। इस पहल के तहत डेंटल क्लीनिकों को कैंसर की निगरानी में सबसे आगे रखा गया है। ऐसा इसलिए किया गया है, क्योंकि बहुत से लोग अपनी नियमित जांच और इलाज के लिए डेंटिस्ट के पास जाते हैं।

इससे मुंह में किसी भी संदिग्ध घाव या लक्षण का शुरुआती दौर में पता लगाने का बेहतर अवसर मिल सकता है। डॉ. मोनी अब्राहम कुरियाकोस ने कहा कि मुंह के कैंसर के इलाज में बीमारी का देर से पता चलना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा, “इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि बीमारी का पता बहुत पहले ही लगा लिया जाए, यानी ठीक उसी जगह पर, जहां मरीज सबसे पहले इलाज के लिए पहुंचते हैं।” डॉ. अश्विन मुल्लाथ के अनुसार, इस पहल का मकसद स्क्रीनिंग को डेंटल केयर का नियमित हिस्सा बनाना है। इससे डेंटिस्ट किसी भी संदिग्ध मामले को तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास जांच के लिए भेज सकेंगे। एस.के. अब्दुल्ला ने कहा कि अगर सामुदायिक स्तर पर ही बीमारी का शुरुआती दौर में पता चल जाए, तो देर से सामने आने वाले मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है। साथ ही, केरल में मुंह के कैंसर के मामलों को भी धीरे-धीरे कम किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसे विभिन्न संस्थानों के आपसी सहयोग और दान के जरिए मिलने वाली आर्थिक सहायता से पूरा किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत जुटाई गई धनराशि से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज के लिए सहायता भी दी जाएगी।

अन्य ख़बरें

वजन नियंत्रण से हड्डियों की मजबूती तक, पोषक तत्वों का पावरहाउस ‘श्री अन्न’, गर्मियों में ऐसे करें सेवन

Newsdesk

बच्चों के बेहतर मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा है ‘एनीमिया’, ऐसे करें बचाव

Newsdesk

इटली-भारत के संबंधों को अपग्रेड करते हुए हम स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा करते हैं:  पीएम मोदी

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading