साइबर फ्रॉड के बाद होल्ड हुई राशि अब तक नहीं मिली, थाना और अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर
सिवनी/नंदौरा : कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत साइबर फ्रॉड के एक मामले में कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद पीड़ित को अब तक उसकी 50 हजार रुपये की राशि वापस नहीं मिल सकी है। पीड़ित वेदप्रकाश सूर्यवंशी पिछले लगभग दो वर्षों से थाना, अधिकारियों और बैंक प्रक्रिया के बीच भटक रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।
जानकारी के अनुसार ग्राम नदौरा थाना लखनवाड़ा निवासी वेदप्रकाश सूर्यवंशी का मोबाइल 9 मई 2024 को छिंदवाड़ा चौक क्षेत्र में कहीं गिर गया था। इसके बाद उनके खाते से फोन-पे के माध्यम से लगभग 75 हजार रुपये की राशि निकल गई। घटना के बाद 11 मई 2024 को वे कोतवाली थाना पहुंचे, जहां लिखित आवेदन देने के साथ उन्हें साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई। शिकायत दर्ज होने के बाद एक्नॉलेजमेंट क्रमांक 32105240014568 जारी हुआ और 50 हजार रुपये की राशि भारतीय स्टेट बैंक के एक खाते में होल्ड कर दी गई।
पीड़ित का आरोप है कि मामला पहले कोतवाली थाना से लखनवाड़ा थाना और फिर वापस कोतवाली थाना भेज दिया गया। इस दौरान वह लगातार कार्रवाई और राशि वापसी के लिए चक्कर लगाता रहा। कोतवाली थाना के कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा कोर्ट से आदेश आने पर राशि वापस होने की बात कही गई थी।
मामले में 10 सितंबर 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सिवनी श्रीमती कला भस्मकर द्वारा आदेश जारी कर भारतीय स्टेट बैंक शाखा सीकर, राजस्थान स्थित खाते में होल्ड 50 हजार रुपये की राशि आवेदक के पंजाब नेशनल बैंक खाते में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए। न्यायालय के आदेश के पालन में कोतवाली थाना द्वारा संबंधित बैंक को पत्र भी भेजा गया तथा स्पीड पोस्ट एवं ई-मेल के माध्यम से प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी दी गई।
इसके बावजूद कई माह बीत जाने के बाद भी पीड़ित के खाते में राशि नहीं पहुंची। वेदप्रकाश सूर्यवंशी का कहना है कि वह कई बार कोतवाली थाना पहुंचे, जहां कभी “एक-दो दिन में राशि आने” तो कभी संबंधित कर्मचारी के अवकाश पर होने की बात कही गई। उन्होंने एसडीओपी एवं थाना प्रभारी को भी मामले की जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
पीड़ित ने प्रशासन एवं संबंधित बैंक अधिकारियों से न्यायालय के आदेश का शीघ्र पालन करवाते हुए होल्ड राशि वापस दिलाने की मांग की है। लगातार चक्कर काटने और सुनवाई नहीं होने से पीड़ित एवं उसके परिवार में गहरा आक्रोश है।


