जबलपुर जिले के शहपुरा क्षेत्र में रेलवे ओवरब्रिज ध्वस्त होने के बाद उत्पन्न भीषण ट्रैफिक समस्या को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट की युगलपीठ, जिसमें जस्टिस और जस्टिस शामिल हैं, ने इस मामले में संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह मामला नेशनल हाईवे-45 पर बने रेलवे ओवरब्रिज के गिरने के बाद सामने आया, जिसके चलते भारी वाहनों और अन्य यातायात को शाहपुरा कस्बे की संकरी और जर्जर आंतरिक सड़कों से गुजारा जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों और रोजाना यात्रा करने वाले हजारों वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शहपुरा निवासी राजेश सिंह राजपूत द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2023 में निर्मित यह ओवरब्रिज पहले अगस्त-सितंबर 2025 में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ था और बाद में 23 फरवरी 2026 को पूरी तरह गिर गया। इसके बाद प्रशासन ने फोरलेन हाईवे का पूरा ट्रैफिक शाहपुरा कस्बे के भीतर मोड़ दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में पक्ष रखते हुए बताया कि कस्बे की छोटी गलियों और कृषि मंडी मार्ग से भारी वाहनों का आवागमन होने के कारण प्रतिदिन कई घंटों तक लंबा जाम लग रहा है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों को 4 से 8 घंटे तक ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ रहा है।
याचिका में यह भी कहा गया कि पौंड़ी रेलवे गेट के माध्यम से एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध है, जिसे खोला जा सकता था। स्थानीय प्रशासन और एसडीएम स्तर से रेलवे अधिकारियों को इस संबंध में अनुरोध भी भेजा गया, लेकिन रेलवे ने गेट खोलने से इनकार कर दिया। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के सचिव, डीआरएम जबलपुर, एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी, कलेक्टर जबलपुर, एमपीआरडीसी और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि खराब सड़क, जाम और अव्यवस्था के बावजूद शाहपुरा टोल प्लाजा पर वाहन चालकों से पूरा टोल टैक्स वसूला जा रहा है, जिसे याचिकाकर्ता ने जनता के साथ अन्याय बताया।
हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इस मामले में प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है। स्थानीय लोगों को भी राहत की आस है कि जल्द ही ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और वैकल्पिक मार्ग खोलने को लेकर ठोस निर्णय लिया जाएगा।


