जबलपुर। बिजली फेडरेशन के राष्ट्रीय सेक्रेटरी जनरल एवं ऑल इंडिया इंटक के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. संजय सिंह ने कहा है कि देश में बिजली कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ाई जा रही है, लेकिन इन कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और पेंशनर्स के भविष्य को लेकर सरकार कोई स्पष्ट गारंटी नहीं दे रही है। इससे कर्मचारियों एवं पेंशनर्स में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
डॉ. संजय सिंह मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन, जबलपुर एवं अन्य श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि निजीकरण से सबसे अधिक संविदा, आउटसोर्स कर्मचारियों एवं ठेका श्रमिकों का भविष्य प्रभावित होगा तथा उनका शोषण बढ़ेगा। उन्होंने श्रम संगठनों से श्रमिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए सक्रियता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान चर्चा एवं संवाद से ही संभव है।
बैठक में श्रम संगठनों के नेता रामराज्य तिवारी, नरेंद्र मिश्रा, मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन जबलपुर के महामंत्री राकेश डी.पी. पाठक, वरिष्ठ जोनल सचिव एन.के. यादव, प्रांतीय उपाध्यक्ष उमाशंकर मेहता, अफसार अहमद, गोपाल चौहान, रामेश्वर गांगे सहित बड़ी संख्या में फेडरेशन के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन, जबलपुर द्वारा राष्ट्रीय नेता डॉ. संजय सिंह का शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश इंटक के उपाध्यक्ष रामराज्य तिवारी ने कहा कि नई श्रम संहिता लागू होने के बाद श्रमिकों और कामगारों की समस्याओं का समाधान करना और अधिक जटिल हो जाएगा। उन्होंने मध्यप्रदेश की वर्तमान श्रमिक परिस्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इंटक सचिव नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि वे श्रमिकों एवं कामगारों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत हैं तथा अनेक मामलों में लेबर कमिश्नर के समक्ष स्वयं पैरवी कर श्रमिकों को न्याय दिला रहे हैं।
फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी.पी. पाठक ने कहा कि नई श्रम संहिता एवं बिजली कंपनियों के निजीकरण का सीधा असर कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ेगा। उन्होंने संविदा कर्मियों, आउटसोर्स कर्मचारियों, कंपनी कैडर कार्मिकों, नियमित कर्मचारियों एवं पेंशनर्स की समस्याओं और उनके समाधान हेतु फेडरेशन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
राकेश डी.पी. पाठक ने मांग की कि निजीकरण से पूर्व सरकार सभी कर्मचारियों के वेतन, सेवा शर्तों एवं पेंशनर्स की पेंशन की गारंटी सुनिश्चित करे तथा सेवा शर्तों में किसी प्रकार का बदलाव न किया जाए। उन्होंने संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने और किसी भी कर्मचारी को सेवा से पृथक न करने की मांग भी रखी।
राष्ट्रीय महासचिव डॉ. संजय सिंह ने कहा कि नई श्रम संहिता लागू होने के बाद विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों एवं ठेका श्रमिकों का भविष्य अधिक असुरक्षित हो गया है। उन्होंने कहा कि श्रम संगठनों को अब और अधिक सक्रिय, सजग एवं सशक्त भूमिका निभानी होगी। उन्होंने बताया कि इंटक संयुक्त मोर्चा देशभर में नई श्रम संहिता का प्रभावी विरोध कर रहा है।
वरिष्ठ जोनल सचिव एन.के. यादव ने नई भर्तियों में सभी संविदा कर्मियों के संविलयन तथा आउटसोर्स कर्मचारियों को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर नियमित करने की मांग की। वहीं प्रांतीय उपाध्यक्ष उमाशंकर मेहता ने फेडरेशन के इतिहास एवं कर्मचारियों के हित में लिए गए निर्णयों और वर्तमान गतिविधियों की जानकारी दी।


