जबलपुर। शहर के मनमोहन नगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार देर रात उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब उपचार के लिए लाई गई गर्भवती महिला को घंटों तक डॉक्टर नहीं मिला। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक खाना खाने के लिए घर गए थे, लेकिन वापस अस्पताल लौटे ही नहीं। डॉक्टर की गैरमौजूदगी से नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध शुरू कर दिया, जिसके बाद युवा कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए और जमकर नारेबाजी करते हुए मुख्य गेट पर धरना दे दिया।
स्थिति बिगड़ती देख स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलते ही चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (सीएमएचओ) डॉ. नवीन कोठारी देर रात स्वयं स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और मोर्चा संभाला। उन्होंने परिजनों और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर मामला शांत कराया तथा तत्काल चिकित्सकों को बुलवाकर महिला का इलाज शुरू कराया।
गर्भवती महिला को नहीं मिला स्ट्रेचर, दो घंटे तक डॉक्टर का इंतजार
युवा कांग्रेस कार्यकर्ता सोनू कुकरेले के अनुसार गुरुवार शाम एक गर्भवती महिला को उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। लेकिन अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम यह था कि महिला को वार्ड तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं था। परिजन किसी तरह महिला को सहारा देकर वार्ड तक पहुंचे, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली।
आरोप है कि भर्ती के बाद करीब दो घंटे तक कोई डॉक्टर महिला को देखने नहीं आया। जब परिजनों ने अस्पताल स्टॉफ से जानकारी ली तो पता चला कि ड्यूटी डॉक्टर अस्पताल में मौजूद ही नहीं हैं। इस बात को लेकर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।
सफाई कर्मी करती मिली बीपी जांच, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
हंगामे के दौरान एक और गंभीर आरोप सामने आया। परिजनों और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि अस्पताल में सफाई कर्मी मरीजों का ब्लड प्रेशर चेक करती दिखाई दी। इसे लेकर लोगों ने स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि जहां प्रशिक्षित मेडिकल स्टॉफ होना चाहिए, वहां अन्य कर्मचारी मरीजों की जांच कर रहे हैं।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में देर रात तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। प्रदर्शनकारियों ने ड्यूटी से गायब चिकित्सक के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निलंबन की मांग की।
सीएमएचओ बोले— डॉक्टर घर गए थे, जांच के बाद होगी कार्रवाई
सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने बताया कि प्राथमिक जानकारी में सामने आया है कि ड्यूटी डॉक्टर खाना खाने के लिए घर गए थे, लेकिन उसके बाद अस्पताल वापस नहीं लौटे। उन्होंने कहा कि संबंधित चिकित्सक से जवाब तलब किया जाएगा और पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही उन्होंने सफाई कर्मी द्वारा बीपी जांच किए जाने के आरोपों की भी जांच कराने की बात कही। सीएमएचओ ने स्वीकार किया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टॉफ और व्यवस्थाओं की कुछ कमी है, जिसे जल्द सुधारने का प्रयास किया जाएगा।
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात के समय अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, संसाधनों की कमी और मरीजों की अनदेखी जैसे मुद्दे लगातार सामने आते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गर्भवती महिला की हालत बिगड़ जाती, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है, वहीं शहर में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।


