हाईवे जाम कर खुली नल-जल योजना की हकीकत
डिंडोरी सी टाइम्स । जिले के बजाग क्षेत्र में एक बार फिर पेयजल संकट ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। भीषण गर्मी के बीच जब लोगों को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत है, उसी समय ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि महिलाओं और ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे और शहडोल-रायपुर स्टेट हाईवे पर स्थित सागर टोला चौराहे में ग्रामीणों ने चक्का जाम कर दिया। महिलाओं ने सड़क पर खाली बर्तन रखकर उग्र प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
करीब दो घंटे तक चले इस प्रदर्शन ने प्रशासन को हिला कर रख दिया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और ग्रामीण शामिल रहे, जिनका कहना था कि गांव में लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है लेकिन प्रशासन केवल आश्वासन देता रहा, समाधान आज तक नहीं हुआ।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर चलाई जा रही नल-जल योजना सिर्फ कागजों में सफल दिखाई जा रही है, जबकि धरातल पर हालात बेहद खराब हैं। कई गांवों में नल तो लगाए गए लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा। कहीं पाइपलाइन अधूरी पड़ी है तो कहीं मोटर खराब होने के कारण सप्लाई बंद है। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल निरीक्षण और बैठकों तक सीमित हैं, जबकि आम लोग रोजाना पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सागर टोला चौराहे पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि सुबह से लेकर देर शाम तक उन्हें पानी के इंतजाम में जुटना पड़ता है। कई महिलाएं दूर-दराज के हैंडपंप और कुओं से पानी लाने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी में यह परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है। महिलाओं का कहना था कि घर के कामकाज, बच्चों की देखभाल और मवेशियों के लिए पानी जुटाना अब बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने खाली बाल्टी, डिब्बे और बर्तन सड़क पर रख दिए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाओं का कहना था कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया लेकिन हर बार केवल जल्द समाधान का आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया।
चक्का जाम की सूचना मिलते ही तहसीलदार बजाग और थाना प्रभारी गाड़ासरई पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की और पानी की समस्या जल्द दूर कराने का आश्वासन दिया। हालांकि शुरू में ग्रामीण प्रशासन की बात मानने को तैयार नहीं हुए और लगातार स्थायी समाधान की मांग करते रहे। ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई चाहिए।
करीब दो घंटे तक चले आंदोलन के कारण जबलपुर-अमरकंटक मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। यात्री बसें, ट्रक और अन्य वाहन सड़क पर फंसे रहे। कई यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गर्मी और जाम के बीच छोटे बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति भी खराब होती दिखाई दी। हालांकि बाद में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जल्द समाधान और नियमित पेयजल आपूर्ति का भरोसा दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने चक्का जाम समाप्त कर दिया।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर हर साल गर्मी आते ही डिंडोरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट क्यों गहराने लगता है। सरकार द्वारा नल-जल योजना के तहत गांव-गांव पानी पहुंचाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बजाग क्षेत्र की यह तस्वीर उन दावों की वास्तविकता सामने ला रही है। करोड़ों की योजनाओं के बावजूद ग्रामीणों को सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल स्रोतों का संरक्षण, समय पर पाइपलाइन और मोटर की मरम्मत तथा नियमित मॉनिटरिंग की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्थिति बन रही है। कई जगहों पर योजना शुरू तो कर दी गई लेकिन रखरखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई। इसका खामियाजा सीधे ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पेयजल संकट का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र हो सकता है। ग्रामीण अब केवल अस्थायी व्यवस्था नहीं बल्कि स्थायी जल प्रबंधन की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल प्रशासन ने समस्या जल्द हल करने का भरोसा दिया है, लेकिन अब देखना होगा कि यह आश्वासन जमीन पर कितना उतरता है। क्योंकि बजाग के सागर टोला चौराहे पर महिलाओं का यह आंदोलन सिर्फ पानी की मांग नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ उठी एक बड़ी आवाज बन चुका है।
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