जबलपुर। एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। हाल ही में जेल से रिहा हुए एक बंदी ने जेल के भीतर कथित अवैध वसूली, बंदियों के साथ प्रताड़ना और सुविधाओं के बदले पैसों के लेन-देन जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। बंदी के आरोपों के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
रिहा हुए बंदी का आरोप है कि जेल में प्रवेश करते ही नए बंदियों से पैसों की मांग शुरू हो जाती है। उसका कहना है कि तलाशी और बैरक आवंटन के दौरान ही कुछ कैदियों द्वारा नए बंदियों पर मासिक रकम तय करने का दबाव बनाया जाता है। आरोपों के अनुसार, रकम देने वाले बंदियों को अपेक्षाकृत बेहतर सुविधाएं और आराम दिया जाता है, जबकि पैसे नहीं देने वालों को मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
मामले में बंदियों के साथ 2 जेल कर्मियों के नाम सामने आए हैं। बंदी ने आरोप लगाया है कि जेल के भीतर कुछ सजायाफ्ता कैदियों के माध्यम से वसूली का नेटवर्क संचालित किया जाता है। इस कथित नेटवर्क में भूरा पटेल, विष्णु, कल्लू और संतोष नामक कैदियों का भी उल्लेख किया गया है, जो नए बंदियों पर दबाव बनाने का काम करते हैं। हालांकि इन सभी आरोपों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बंदी का यह भी कहना है कि मुलाकात के दौरान परिजनों तक यह संदेश पहुंचाया जाता है कि यदि बंदी को जेल के भीतर “सुकून” से रखना है तो नियमित खर्चा देना होगा। आरोप यह भी है कि वसूली की राशि का आपस में बंटवारा किया जाता है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुए एक औचक निरीक्षण के दौरान जेल व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने आए थे। चर्चा है कि निरीक्षण के समय कुछ अधिकारी मौजूद नहीं मिले तथा बंदियों ने अनौपचारिक बातचीत में जेल के भीतर हो रही कथित गतिविधियों की जानकारी दी। वहीं, बच्चा वार्ड में अन्य कैदियों के पाए जाने और वहां सुविधाओं के उपयोग को लेकर भी सवाल उठे हैं।
एक अन्य आरोप में कहा गया है कि हाल ही में एक बंदी के साथ मारपीट की घटना हुई थी, लेकिन बाद में कथित दबाव के चलते उसने आधिकारिक बयान में मारपीट से इनकार कर दिया। हालांकि इस संबंध में भी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
फिलहाल जेल प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। वहीं स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो जेल व्यवस्था और निगरानी प्रणाली में बड़े स्तर पर बदलाव संभव


