मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर जिले के एक युवा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। वारासिवनी तहसील के ग्राम सांवगी निवासी राजवर्धन राणा का चयन मध्यप्रदेश शासन की पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत इंग्लैंड की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी The London School of Economics and Political Science में अध्ययन के लिए हुआ है।
राजवर्धन राणा, पिता संदीप राणा एवं माता पूर्णिमा राणा के पुत्र हैं। वे ग्राम सांवगी के पटेली गली, दुर्गा मंदिर के पास के निवासी हैं। उनका चयन वर्ष 2025-26 में “मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन” पाठ्यक्रम के लिए हुआ है। यह पाठ्यक्रम दो वर्ष की अवधि का है। राजवर्धन को इस प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रथम वर्ष की शिक्षण शुल्क राशि के रूप में 40 लाख 70 हजार 736 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा योजना के तहत निर्वाह भत्ता, आकस्मिकता भत्ता, बीमा राशि तथा वायुयान किराया जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
राजवर्धन राणा की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले में खुशी का माहौल है। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर विश्व की अग्रणी शिक्षण संस्थाओं में से एक लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस तक पहुंचना युवाओं के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है। राजवर्धन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और निरंतर मेहनत को दिया। उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। उनका सपना है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे समाज और प्रशासनिक क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य करें।
पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश शासन द्वारा पिछड़ा वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को विदेश में स्नातकोत्तर एवं शोध उपाधि (पीएचडी) के अध्ययन हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे वैश्विक ज्ञान और अनुभव प्राप्त कर देश एवं समाज के विकास में योगदान दे सकें।
राजवर्धन राणा की यह सफलता जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की उनकी कहानी यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प और शिक्षा के प्रति समर्पण से हर सपना साकार किया जा सकता है।


