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Jabalpur
May 29, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

वन विकास निगम में 6000 रुपए लाओ, जलाऊ चट्ठा पाओ


चांगोटोला।
बालाघाट जिले के वन विकास निगम लामता अंतर्गत ग्रामीण हितग्राहियों को निर्धारित दर पर दी जाने वाली जलाऊ लकड़ी अब कथित रूप से दोगुनी कीमत पर बेचे जाने के आरोपों में घिर गई है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है तथा वन विकास निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश वन विभाग के प्रावधानों के तहत ग्राम पंचायतों से प्राप्त टोकन रसीद के आधार पर हितग्राहियों को लगभग 383 रुपये प्रति चट्ठा की दर से जलाऊ लकड़ी उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन आरोप है कि लामता वन विकास निगम के चांगोटोला क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सोनखार एवं पाटादेह के हितग्राहियों के नाम पर मनी रसीद काटी गई, जबकि जलाऊ लकड़ी की खेप ग्राम पंचायत गुडरू अंतर्गत हीरमनटोला में खाली कराई गई। जब इस संबंध में गुडरू स्थित उत्तर वन मंडल के बैरियर चेक पोस्ट पर जानकारी ली गई तो संबंधित ट्रैक्टर एवं मनी रसीद की कोई एंट्री दर्ज नहीं पाई गई। इससे पूरे मामले में अनियमितता एवं विभागीय मिलीभगत की आशंका और भी गहरा गई है।
नियम विरुद्ध बेचे जाने वाले चट्टे, 6000 रुपये में कौन-कौन शामिल?———-
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक ट्रैक्टर जलाऊ लकड़ी लगभग 6000 रुपये तक वन विकास निगम के चौकीदार के माध्यम से बेची जा रही है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में अब तक करीब 150 से 200 जलाऊ चट्ठों की सप्लाई की जा चुकी है तथा प्रतिदिन 5 से 7 ट्रैक्टर लकड़ी परिवहन करते देखे जाते हैं। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर जलाऊ लकड़ी दूसरे स्थानों पर सप्लाई की जा रही है, जबकि विभागीय उत्तर वन मंडल के बैरियर में न तो नियमित एंट्री हो रही है और न ही किसी प्रकार की प्रभावी जांच या चेकिंग की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में वन विकास निगम के जिम्मेदार कर्मचारियों जैसे डिप्टी, रेंजर, और चौकीदार की मिलीभगत हो सकती है। क्षेत्र में चर्चा है कि चौकीदार के माध्यम से कथित रूप से 6000 रुपए पर ट्रैक्टर ट्राली बेचकर वसूली कराई जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। लेकिन संबंधित डिप्टी सतीश कुमारे से जानकारी ली गई तो उन्होंने इस सम्बन्ध में गोलमोल जवाब दिया। सवाल अब भी बरकरार है कि आखिर मनी रशीद पाटादेह, सोनखार की है तो कैसे दूसरे स्थान में जलाऊ चट्टे से भरी ट्रैक्टर भेजी जा रही है।
क्या नाके में नहीं होती चेकिंग?———
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वन विकास निगम से इन दिनों जलाऊ चट्टे का वितरण तो किया जा रहा हैं परंतु यह भी सच है कि अत्यधिक मात्रा चट्टे गुडरू बैरियर क्रॉस होकर अन्यत्र ग्राम में चट्ठे का वितरण भारी मात्रा में किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या उत्तर वन मंडल के अंतर्गत आने वाला बैरियर में चेकिंग नहीं होती और होती है तो आखिर बिना वैध मनी रशीद के गुडरू बैरियर से ट्रैक्टर ट्राली कैसे बचकर निकल गई। गुडरु बैरियर प्रभारी और उपस्थित ज़िम्मेदार क्या गहरी निद्रा में थे? या कमीशन का खेल खेलते हुए खामोश बने रहे? उत्तर वन मंडल से सवाल है कि इस तरह जिम्मेदार अंजान बने रहेंगे तो कैसे जंगल और पर्यावरण की सुरक्षा की जा सकेगी।
नियमों को ताक पर रखकर की जा रही बिक्री———
ग्रामीणों एवं क्षेत्रीय लोगों ने वन विकास निगम परियोजना परिक्षेत्र लामता में जलाऊ चट्ठों के वितरण एवं बिक्री की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो विभाग को भारी राजस्व नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई तथा निलंबन की मांग प्रशासन से की है। अब देखना यह होगा कि सारे सबूत मिलने के बाद भी वन विकास निगम लामता एवं उत्तर वन मंडल अपने कर्मचारियों पर किस तरह की कार्यवाही करता है या हर बार की तरह इस बार भी लाफरवाह कर्मचारियों पर मेहरबानी बरसता है।

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