जबलपुर के बरगी डैम में हुए चर्चित क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब बड़े प्रशासनिक और तकनीकी खुलासों तक पहुंच गई है। जांच के दौरान सामने आए एक महत्वपूर्ण पत्र ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है। पत्र में साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि क्रूज का एक इंजन पूरी तरह खराब हो चुका था, जबकि दूसरा इंजन भी बार-बार स्टार्ट होने में दिक्कत दे रहा था। इसके बावजूद क्रूज को लगातार संचालन में रखा गया और यात्रियों की जान जोखिम में डालकर सफर कराया जाता रहा। इस खुलासे ने पर्यटन विभाग और संचालन से जुड़े अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार यह पत्र हादसे से पहले संबंधित अधिकारियों तक पहुंच चुका था, लेकिन किसी ने भी तकनीकी खामियों को गंभीरता से नहीं लिया। यही वजह है कि अब जांच आयोग इसे सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही का परिणाम मानकर जांच आगे बढ़ा रहा है। न्यायिक जांच कर रहे रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश टूरिज्म के रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा, मैकल बोट क्लब के मैनेजर और एमपी टूरिज्म के टेक्निकल एक्सपर्ट को तलब किया है।
बुधवार को टेक्निकल एक्सपर्ट के बयान दर्ज किए गए। पूछताछ के दौरान क्रूज की तकनीकी स्थिति, उसकी फिटनेस रिपोर्ट, नियमित मेंटेनेंस और संचालन की अनुमति से जुड़े कई सवाल किए गए। जांच आयोग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि जब इंजन की खराबी की जानकारी पहले से थी, तब यात्रियों को लेकर क्रूज को पानी में उतारने की अनुमति किस आधार पर दी गई। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या फिर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी कर संचालन जारी रखा गया।
मामले में यह भी सामने आया है कि तकनीकी खराबियों की शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। जांच आयोग अब उन अधिकारियों की भूमिका भी खंगाल रहा है, जिन्होंने शिकायतों और चेतावनियों को नजरअंदाज किया। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और अधिकारियों और कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी ने साफ कहा है कि जांच का उद्देश्य केवल हादसे की वजह तलाशना नहीं, बल्कि उस लापरवाह तंत्र को सामने लाना भी है जिसकी वजह से लोगों की जान खतरे में पड़ी। उन्होंने संकेत दिए हैं कि भविष्य में जल पर्यटन और क्रूज संचालन के लिए सख्त सुरक्षा नियम और जवाबदेही तय करने की सिफारिश की जाएगी, ताकि दोबारा इस तरह की घटना न हो सके।


