33.9 C
Jabalpur
May 30, 2026
सी टाइम्स
हेल्थ एंड साइंस

स्पेस में तैयार हो रहे स्टेम सेल्स से बेहतर हो सकता है कैंसर और ब्लड डिसऑर्डर का इलाज



नई दिल्ली, 29 मई । इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर वैज्ञानिक एक ऐसे प्रयोग पर काम कर रहे हैं, जो भविष्य में कैंसर और खून से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज को बेहतर बना सकता है। आईएसएस के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट की गई जानकारी के मुताबिक, स्पेस में स्टेम सेल्स उगाने पर रिसर्च की जा रही है, ताकि पृथ्वी पर मरीजों के इलाज के लिए बेहतर गुणवत्ता वाली और अधिक मात्रा में स्टेम सेल्स तैयार की जा सकें।

आईएसएस पृथ्वी पर जीवन को बेहतर बनाने वाली नई तकनीकों और दवाओं के लिए एक उन्नत टेस्टबेड के रूप में काम कर रहा है। स्टेम सेल रिसर्च इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस रिसर्च से भविष्य में स्टेम सेल थेरेपी ज्यादा प्रभावी, सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए यह एक बड़ी उम्मीद की किरण बन सकती है।

यह प्रयोग न केवल कैंसर, ब्लड कैंसर बल्कि अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज को भी बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है। आईएसएस ने पोस्ट में बताया कि जिन लोगों को गंभीर बीमारियों से लड़ने या कीमोथेरेपी के बाद अपने ब्लड सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत होती है, उनके लिए ब्लड स्टेम सेल्स बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि माइक्रोग्रैविटी यानी बेहद कम गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण में स्टेम सेल्स किस तरह विकसित होते हैं और क्या वे लंबे समय तक अपनी क्षमता बनाए रख सकते हैं?

पृथ्वी पर उगाई गई स्टेम सेल्स समय के साथ अपनी क्षमता खोने लगती हैं और लगातार विभाजित होने की शक्ति कम हो जाती है, लेकिन माइक्रोग्रैविटी (शून्य गुरुत्वाकर्षण) में उगाई गई स्टेम सेल्स इस समस्या को कम कर सकती हैं। रिसर्चर्स का मानना है कि स्पेस में तैयार की गई स्टेम सेल्स बेहतर गुणवत्ता वाली और ज्यादा मात्रा में हो सकती हैं। इससे ब्लड कैंसर, इम्यून सिस्टम की बीमारियों और जानलेवा ब्लड डिसऑर्डर वाले मरीजों के इलाज में काफी सुधार हो सकता है।

आईएसएस ने दो तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसमें से पहली तस्वीर में स्टेम सेल्स एक्स-एच2 प्रयोग में नासा की एस्ट्रोनॉट जेसिका मीर लाइफ साइंसेज ग्लोबबॉक्स के अंदर काम करती दिख रही हैं। स्पेस में विकसित स्टेम सेल्स के नमूनों को फ्रीज करके पृथ्वी पर भेजा जाएगा, जहां उनका विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। वहीं, दूसरी तस्वीर में हीमेटोपोएटिक स्टेम कोशिकाओं की माइक्रोस्कोपिक छवि दिखाई गई है। इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य बायो सर्व के नए माइक्रोग्रैविटी बायोरिएक्टर की मदद से बड़ी संख्या में उच्च गुणवत्ता वाली स्टेम सेल्स तैयार करना है।

अन्य ख़बरें

इबोला का खतरा: बीएमसी ने कस्तूरबा अस्पताल में 10 बिस्तरों वाला आइसोलेशन वार्ड तैयार किया

Newsdesk

डिहाइड्रेशन ही नहीं, हीट स्ट्रोक से भी बचाव में कारगर ‘अनानास’, पीरियड्स में भी फायदेमंद

Newsdesk

गर्मी में व्यायाम क्यों जरूरी? बेहतर होता है रक्त संचार और गर्मी सहन करने की क्षमता

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading