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May 31, 2026
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एस्ट्रोनॉट्स की पहचान ‘मिशन पैच’, शुभांशु शुक्ला ने किया भावुक पोस्ट



नई दिल्ली, 30 मई  भारतीय एयरफोर्स के ऑफिसर और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला अक्सर अपनी स्पेस यात्रा से जुड़ी रोचक और मजेदार पोस्ट कर जानकारी देते रहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने मिशन पैच की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए खास अहमियत पर रोशनी डाली है।

उन्होंने इंस्टाग्राम पर तस्वीरों को पोस्ट करते हुए लिखा कि मिशन पैच महज एक प्रतीक या बिल्ला नहीं होते, बल्कि किसी मिशन की पूरी भावना, उद्देश्य, मूल्यों और उसमें शामिल हर व्यक्ति के सामूहिक प्रयास को भी दिखाता है।

शुभांशु शुक्ला ने बताया कि मानव अंतरिक्ष उड़ान की एक पुरानी परंपरा है कि ट्रेनिंग पूरा होने के बाद अंतरिक्ष यात्री अपने प्रशिक्षण सूट पर मिशन पैच लगाते हैं। यह एक छोटा-सा काम लगता है, लेकिन इसका अर्थ बहुत गहरा होता है। हर पैच एक बड़ी कहानी का हिस्सा बन जाता है। यह समर्पण, दृढ़ता और टीम वर्क का प्रतीक होता है जो क्रू को उड़ान के करीब लाता है। साथ ही, यह पूरी टीम को मिशन के आदर्शों और आकांक्षाओं के इर्द-गिर्द एकजुट करने का माध्यम भी है।

सवाल है कि मिशन पैच होते क्या हैं? बता दें कि मिशन पैच विशेष लोगो या निशान होते हैं, जिन्हें एस्ट्रोनॉट्स और उनसे जुड़े लोग स्पेस फ्लाइट मिशन के दौरान पहनते हैं। पैच डिजाइन करना अक्सर क्रू को सौंपा जाने वाला पहला महत्वपूर्ण काम होता है। एस्ट्रोनॉट्स आपस में मिलकर या ग्राफिक डिजाइनर की मदद से रंग, तस्वीरें और निशान चुनते हैं। यह पैच न सिर्फ मिशन के लक्ष्य को दिखाता है बल्कि टीम के हर सदस्य की भावनाओं और पहचान को भी दिखाता है।

शुभांशु शुक्ला ने पोस्ट की एक तस्वीर के साथ लिखा कि इन तस्वीरों में हम अलग-अलग ट्रेनिंग सेंटर्स पर मिशन पैच लगा रहे हैं, जो हमारी तैयारी के महत्वपूर्ण चरणों के पूरा होने का संकेत देते हैं। हर पैच हमारी लंबी यात्रा में एक छोटा पड़ाव है।

इतिहास में कई मिशन पैच प्रसिद्ध हुए हैं। उदाहरण के लिए, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए पहले शटल मिशन एसटीएस-88 के पैच में उगता सूरज बना था, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नई शुरुआत का प्रतीक था। वहीं, एसटीएस-135 के पैच में ग्रीक वर्णमाला का आखिरी अक्षर ‘ओमेगा’ था, क्योंकि यह अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के स्पेस शटल प्रोग्राम का अंतिम मिशन था।

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