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June 2, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

जरूरत पड़ी तो ईरान पर फिर होगी सैन्य कार्रवाई: इजरायली राजदूत



नई दिल्ली, 1 जून  वेस्ट एशिया में हालात सामान्य करने की कोशिश वैश्विक स्तर पर जारी है। अमेरिका-ईरान में संभावित समझौते की चर्चा जोरों पर है। इजरायल एक अहम कड़ी भी है, तो फिर वह इस पूरे मामले को वो कैसे देखता है? दूसरी ओर, लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगर पर हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले का आदेश सोमवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दिया। आखिर इसके पीछे की वजह क्या है?

आईएएनएस ने नई दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के राजदूत रियूवेन अजार से वेस्ट एशिया के ताजा हालात को लेकर सवाल पूछे।

अजार से “ग्रेटर वेस्ट एशिया” की अवधारणा को लेकर पूछा गया कि आखिर ये सोच पारंपरिक भू-राजनीतिक संतुलन को कैसे बदल रही है? उन्होंने कहा, “ईरानी सत्ता विगत दो दशकों से लोगों के लिए खतरा बनी हुई है। जॉर्डन समेत कई देश जो अब्राहम समझौते के समर्थक हैं, इस खतरे को दूर करना चाहते हैं। अमेरिका से भी बातचीत जारी है। हम भी इस इलाके की सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं, साथ ही आर्थिक तौर पर भी हम मदद करने को तैयार हैं ताकि ये इलाके समृद्ध हो सकें।”

यूरेनियम संवर्धन प्रोग्राम को ईरानी राजदूत ने “अपना कानूनी अधिकार” बताया था। इस पर अजार ने कहा कि जो भी कानूनी अधिकारों के तहत काम करना चाहता है, उसे उस व्यवस्था का पालन भी करना होगा। आरोप लगाया कि “ईरान वर्षों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह कर रहा है और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के नियमों का पालन नहीं कर रहा है।” दावा किया कि आईएईए की रिपोर्टों में भी ईरान को नियमों का पालन न करने वाला बताया गया है।

राजदूत अजार ने कहा कि इजरायल जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य की बात है लेकिन ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए संघर्षविराम की शर्तों को लेकर बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।

वहीं, लेबनान में जारी कार्रवाई को लेकर इजरायली राजदूत ने कहा, “इजरायल को अपने उत्तरी इलाकों में रह रहे नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करना पड़ेगा। सीजफायर के बाद भी 1000 से अधिक रॉकेट दागे गए हैं, ड्रोन (यूएवी) का इस्तेमाल हुआ है और 12 लोगों की मौत हुई है, इसलिए यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है। जब तक हिज्बुल्लाह हमले रोकने वाला स्थायी संघर्षविराम नहीं मानता, तब तक कार्रवाई जारी रहेगी।”

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