जबलपुर। पेट्रोल और डीजल पर ‘वैट’ (VAT) कम करके केंद्र और राज्य सरकारों ने आम जनता को राहत दी है, लेकिन कमर्शियल एलपीजी गैस (Commercial LPG) पर 18 प्रतिशत जीएसटी (GST) का बड़ा असर छोटे व्यापारियों और रिक्शा चालकों पर पड़ रहा है। इस कर को तत्काल कम किया जाए, इस मांग को लेकर ‘ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन’ की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कानून मंत्रालय और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक बार फिर ‘स्मरण पत्र’ भेजा गया है।
फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन सोलंके ने इस संबंध में सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले 28 मार्च और 9 मई 2026 को भी इस विषय पर विस्तृत ज्ञापन दिया गया था।
तभी गरीबों के घर का चूल्हा जलता रहेगा!
पत्र में कहा गया है कि, पहले 55 से 60 रुपये प्रति लीटर मिलने वाली गैस अब 100 से 110 रुपये तक पहुंच गई है। उस पर भी 18% का भारी जीएसटी होने के कारण निम्नलिखित वर्गों का जीवन कठिन हो गया है:
छोटे व्यापारी बर्बाद
छोटे होटल, रेस्तरां संचालक और स्ट्रीट फूड (ठेला) विक्रेताओं का आर्थिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
रिक्शा चालक संकट में: एलपीजी से चलने वाले ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए इस महंगी गैस के कारण दैनिक आजीविका चलाना कठिन हो गया है और उनके रोजगार पर संकट उत्पन्न हो गया है।
आम जनता पर असर: कमर्शियल गैस महंगी होने से होटलों में भोजन और परिवहन सेवाएं महंगी हो गई हैं, जिसका अंतिम भार मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
“गैस की कीमतें किफायती होने पर ही इन छोटे कामगारों और गरीबों के घर का चूल्हा जलता रहेगा। जमीनी स्तर से जुड़े इस वर्ग को राहत मिलने पर देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी,” ऐसा विश्वास फाउंडेशन के अध्यक्ष नितिन सोलंके ने व्यक्त किया है।
तत्काल निर्णय की अपेक्षा
जिस प्रकार ईंधन के दाम कम करके जनता को राहत दी गई, उसी प्रकार कमर्शियल एलपीजी पर 18% जीएसटी दर में तत्काल कटौती की जाए, ऐसी मांग फाउंडेशन ने की है। इस जनहित से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारें सकारात्मक निर्णय लेंगी, ऐसी अपेक्षा व्यक्त की गई है।


