July 25, 2026
सी टाइम्स
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मानसून से पहले ही शहर में हादसों की दस्तक, कहीं कारों पर गिरा पेड़, कहीं जलभराव से थमा यातायात, तो कहीं ट्रांसफॉर्मर से उठने लगीं चिंगारियां

जबलपुर। शहर में मानसून ने अभी पूरी तरह दस्तक भी नहीं दी है, लेकिन हादसों की शुरुआत हो चुकी है। हल्की बारिश और तेज हवाओं ने नगर निगम और बिजली विभाग की मानसून पूर्व तैयारियों की सच्चाई सड़क पर लाकर रख दी है। कहीं पेड़ गिर रहे हैं, कहीं जलभराव से यातायात प्रभावित हो रहा है, तो कहीं महीनों से शिकायतों के बावजूद खराब ट्रांसफॉर्मर बारिश में बड़े हादसे का संकेत दे रहे हैं।

ताजा मामला एमएलबी रोड के पास सामने आया, जहां एक विशाल पेड़ अचानक तीन वाहनों के ऊपर गिर गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, वरना एक बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था। सवाल यह है कि शहर में ऐसे जर्जर और खतरनाक पेड़ों की पहचान मानसून से पहले क्यों नहीं की गई? आखिर संबंधित विभाग किस हादसे का इंतजार कर रहे हैं?

इसी तरह ग्वारीघाट रोड पर बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी क्षेत्र में एक जगह पेड़ और होर्डिंग गिरने की घटना भी सामने आई। यह स्थिति बताती है कि शहर की नालियां, जल निकासी व्यवस्था और सड़क सुरक्षा इंतजाम सिर्फ कागजों पर दुरुस्त दिखाई देते हैं।

सबसे गंभीर स्थिति शास्त्री ब्रिज के पास सामने आई, जहां बारिश शुरू होते ही ट्रांसफॉर्मर से चिंगारियां निकलने लगीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ट्रांसफॉर्मर से महीनों से स्पार्किंग की शिकायत की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। अब बारिश शुरू होने के साथ हादसे का खतरा और बढ़ गया है। बिजली विभाग की लापरवाही किसी दिन बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

कहते हैं, “हादसे अचानक नहीं होते, उन्हें लापरवाही लंबे समय तक तैयार करती है।” शहर में आज जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे इसी लापरवाही की गवाही दे रही हैं। मानसून से पहले बैठकें हुईं, दावे किए गए, तैयारियों की बातें हुईं, लेकिन पहली ही बारिश ने बता दिया कि शहर अभी भी खतरों के साये में खड़ा है।

अब सवाल सीधा है क्या प्रशासन और संबंधित विभाग केवल हादसे के बाद हरकत में आएंगे? क्या पेड़ गिरने, ट्रांसफॉर्मर फटने या जलभराव में किसी की जान जाने के बाद ही जिम्मेदारों को जिम्मेदारी याद आएगी?

शहर के नागरिक टैक्स देते हैं, बिजली बिल भरते हैं और सुरक्षित व्यवस्था की उम्मीद रखते हैं। बदले में उन्हें जलभराव, गिरते पेड़, लटकते होर्डिंग और चिंगारियां छोड़ते ट्रांसफॉर्मर मिल रहे हैं। यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ है।

मानसून अभी शुरू ही हुआ है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में शहर को बारिश से ज्यादा विभागीय लापरवाही से डरना पड़ेगा।

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