परसवाड़ा (बालाघाट)। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही “हर घर जल” योजना ग्राम पंचायत पोंडी में अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। लाखों रुपये की लागत से नल जल योजना के तहत गांव में पाइपलाइन बिछाकर घर-घर नल कनेक्शन लगाए गए, लेकिन अधिकांश ग्रामीणों को आज तक नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है। परिणामस्वरूप पूरे ग्रीष्मकाल में ग्रामीणों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लगे नलों से पानी नहीं आने के कारण उन्हें हैंडपंपों और अन्य जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई हैंडपंप भी कुछ समय तक चलने के बाद पानी देना बंद कर देते हैं या बेहद कम पानी देते हैं। ऐसे में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को प्रतिदिन पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सुबह होते ही हैंडपंपों पर लोगों की लंबी कतारें लग जाती हैं और घंटों इंतजार के बाद भी जरूरत भर पानी नहीं मिल पाता।
ग्राम निवासी रजवंती नागेश्वर ने बताया कि गांव में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनके घर के सामने नल कनेक्शन लगा हुआ है, लेकिन उसमें कभी पानी नहीं आया। उन्होंने बताया कि पीएचई विभाग को कई बार शिकायत करने के साथ ऑनलाइन आवेदन भी किए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। मजबूरी में परिवार को हैंडपंप के सहारे ही जीवनयापन करना पड़ रहा है।
वहीं ग्रामीण हफीज खान, योगेश्वर ढोढरे, प्रशांत सर्राटे और महेश पचे ने बताया कि नल जल योजना शुरू होने के बाद साल भर में केवल दो बार ही नलों से पानी मिला। इसके बाद ग्रामीणों को साइकिल, मोटरसाइकिल और अन्य साधनों से दूर-दराज क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो गई थी तथा पानी जुटाने में ही दिन का बड़ा हिस्सा निकल जाता था।
ग्रामीण प्रशांत सर्राटे ने बताया कि पानी की समस्या का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। सुबह छोटे-छोटे बच्चे स्कूल की तैयारी करने के बजाय बाल्टी और डिब्बे लेकर हैंडपंपों की ओर निकल पड़ते हैं। वहीं योगेश्वर ढोढरे ने बताया कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान कई स्थानों पर खोदे गए गड्ढे अब भी खुले पड़े हैं, जिससे बारिश के मौसम में दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
सरपंच प्रतिनिधि हिमेश परते ने बताया कि प्रारंभिक सर्वे के अनुसार गांव में दो पानी की टंकियां बननी चाहिए थीं, लेकिन केवल एक टंकी का निर्माण किया गया। इसके कारण पूरे गांव में समान रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती। उन्होंने बताया कि मोटर खराब होने और तकनीकी खामियों के चलते भी जलापूर्ति प्रभावित रहती है। साथ ही योजना का कार्य अभी तक पूरी तरह ग्राम पंचायत को हस्तांतरित नहीं किया गया है और इसका संचालन ठेकेदार के माध्यम से किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जल संकट की गंभीर समस्या के बावजूद विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की गई। शिकायतों के बाद भी केवल आश्वासन मिलते रहे, जबकि जमीनी हालात नहीं बदले।


