मुंदरी, कचरा, आमघाट, संगम सहित कई घाटों से दिन-रात रेत परिवहन का आरोप; ग्रामीणों ने खनिज विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग*
अनूपपुर/चोलना। जैतहरी थाना क्षेत्र के चोलना इलाके में कथित अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुंदरी घाट, कचरा घाट, आमघाट, संगम घाट, गुर्जर नाला और झरियाटोला से दिन-रात ट्रैक्टरों के जरिए रेत निकाली जा रही है और छाता, खूंटाटोला सहित आसपास के क्षेत्रों में पहुंचाई जा रही है। इसके बावजूद न तो खनिज विभाग की प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे रही है और न ही पुलिस की सख्ती।
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में हेमंत, शैलेंद्र, पिंकू, रिंकू, हरिनाथ, सुरेश और शुभम नामक व्यक्तियों की भूमिका को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही संबंधित व्यक्तियों का पक्ष सामने आया है। इसलिए इन नामों का उल्लेख केवल स्थानीय चर्चाओं के संदर्भ में किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन घाटों से लगातार रेत का उत्खनन और परिवहन हो रहा है, तो अब तक बड़ी कार्रवाई, वाहन जब्ती या एफआईआर जैसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जिले के अन्य क्षेत्रों में समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन चोलना क्षेत्र में कथित गतिविधियों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत से भरे ट्रैक्टर खुलेआम सड़कों पर दौड़ते दिखाई देते हैं। इसके बावजूद खनिज विभाग और जैतहरी पुलिस की ओर से प्रभावी रोकथाम नहीं होने से लोगों में यह धारणा बन रही है कि अवैध कारोबार पर नियंत्रण के लिए अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
*जनता के सवाल*
मुंदरी, कचरा, आमघाट और संगम घाट पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? रेत से भरे ट्रैक्टरों की निगरानी और जांच कौन करेगा? क्या खनिज विभाग और पुलिस को इस गतिविधि की जानकारी नहीं है?
यदि जानकारी है, तो कार्रवाई में देरी का कारण क्या है?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक एवं खनिज विभाग से संयुक्त जांच कराने, संवेदनशील घाटों पर ड्रोन और सीसीटीवी निगरानी कराने, अवैध परिवहन में प्रयुक्त वाहनों की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की मांग की है।


