July 7, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

नर्मदा किनारे सुनसान घाटों पर बढ़ रही अश्लील गतिविधियां

सामाजिक मर्यादाएं हो रहे तार- तार, आपत्ति करने पर करते हैं विवाद
जबलपुर। मां नर्मदा के पवित्र घाट, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना, ध्यान और दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहीं शहर के कुछ सुनसान तटीय क्षेत्रों का माहौल अब चिंता का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि दोपहर बाद से शाम तक कई ऐसे स्थानों पर युवक-युवतियों का जमावड़ा लगने लगता है, जहां आवाजाही कम रहती है। इन क्षेत्रों में सार्वजनिक मर्यादा के विपरीत व्यवहार किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
रहवासियों का कहना है कि जिन स्थानों पर कभी श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान, जप-तप और नर्मदा दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहां अब कई बार ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं, जिनसे लोगों को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालु, महिलाएं और बुजुर्ग असहज महसूस करते हैं और कई लोग ऐसे स्थानों पर रुकने से भी बचने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार कुछ युवक-युवतियां सुनसान घाटों और झाड़ियों से घिरे इलाकों में घंटों तक बैठे रहते हैं। आरोप है कि कई बार उनका व्यवहार सार्वजनिक स्थल और धार्मिक वातावरण के अनुरूप नहीं होता। इससे न केवल सामाजिक मर्यादाएं प्रभावित होती हैं, बल्कि मां नर्मदा के प्रति लोगों की धार्मिक आस्था भी आहत होती है।
रहवासियों का कहना है कि कई बार उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए ऐसे लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन इसके बदले उन्हें बहस, अभद्रता और विवाद का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में स्थिति झगड़े तक पहुंचने की नौबत भी आ गई। यही कारण है कि अब अधिकांश लोग किसी विवाद से बचने के लिए चुप रहना ही बेहतर समझते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दोपहर बाद से शाम तक कई संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की नियमित मौजूदगी दिखाई नहीं देती। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग ऐसे स्थानों को अपना अड्डा बना लेते हैं। नागरिकों का मानना है कि यदि इन क्षेत्रों में नियमित गश्त, निगरानी और प्रभावी कार्रवाई हो तो ऐसी गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
सामाजिक संगठनों का भी कहना है कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे धार्मिक स्थलों पर सार्वजनिक शालीनता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर ऐसा व्यवहार करता है जिससे अन्य लोगों को असुविधा हो या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो, तो उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि नर्मदा तट के सुनसान घाटों पर नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, आवश्यक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने वाले लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो नर्मदा तट की गरिमा और धार्मिक वातावरण प्रभावित होता रहेगा।

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