26.5 C
Jabalpur
July 8, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

प्राइवेट कॉलेजों को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने से तमिलनाडु ने सरकारी कोटे की 700 एमबीबीएस सीटें खोईं : डॉ. अंबुमणि


चेन्नई, 8 जुलाई पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) ने बुधवार को आरोप लगाया कि छह निजी मेडिकल कॉलेजों को डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी में परिवर्तित किए जाने के कारण तमिलनाडु ने लगभग 700 सरकारी कोटा एमबीबीएस सीटें खो दी हैं। पार्टी का कहना है कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के छात्रों के लिए सस्ती चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच गंभीर रूप से प्रभावित होगी।

एक बयान में पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को डीम्ड यूनिवर्सिटी में बदलने से राज्य सरकार के कोटे के तहत उपलब्ध सीटों की संख्या में भारी कमी आई है।

उनके अनुसार, सेंट पीटर्स मेडिकल कॉलेज, धनलक्ष्मी श्रीनिवासन मेडिकल कॉलेज और चेन्नई स्थित श्रीनिवासन मेडिकल कॉलेज सहित तीन संस्थानों को पहले ही डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप राज्य को लगभग 350 सरकारी कोटा एमबीबीएस सीटों का नुकसान हुआ है, जो पहले इन कॉलेजों में उपलब्ध थीं।

उन्होंने आगे दावा किया कि मदुरंथकम स्थित करपगा विनायगा मेडिकल कॉलेज सहित तीन और निजी मेडिकल कॉलेजों को जल्द ही डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने की संभावना है, जिससे सरकार के कोटे की लगभग 350 और एमबीबीएस सीटें समाप्त हो जाएंगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह कुल मिलाकर लगभग 700 सस्ती एमबीबीएस सीटें तमिलनाडु की काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगी।

तमिलनाडु में वर्तमान में लगभग 13,000 एमबीबीएस सीटें हैं, जिनमें 36 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5,050 सीटें, 22 निजी मेडिकल कॉलेजों में 3,900 सीटें, पांच निजी विश्वविद्यालयों में 850 सीटें, डीम्ड यूनिवर्सिटियों में 3,050 सीटें और एक केंद्रीय सरकारी संस्थान में 150 सीटें शामिल हैं।

अखिल भारतीय कोटा (ऑल इंडिया कोटा) की सीटों के अलावा, निजी मेडिकल कॉलेजों में सरकारी कोटा की सीटों पर प्रवेश राज्य द्वारा आयोजित नीट आधारित काउंसलिंग के माध्यम से किया जाता है।

अंबुमणि ने तर्क दिया कि निजी कॉलेजों में सरकारी कोटे के तहत प्रवेश पाने वाले छात्र सालाना 4.35 लाख रुपये से 5.40 लाख रुपये तक की ट्यूशन फीस देते हैं। एक बार इन संस्थानों के डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद छात्रों को हर साल 23 लाख रुपये से 30 लाख रुपये तक फीस चुकानी पड़ सकती है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए चिकित्सा शिक्षा लगभग पहुंच से बाहर हो जाएगी।

पीएमके नेता ने यह भी सवाल उठाया कि जिन कॉलेजों का पहले तमिलनाडु डॉ. एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्धता थी, उन्हें उस विश्वविद्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त किए बिना डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा कैसे दिया गया।

तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग करते हुए अंबुमणि ने तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया कि जिन छह जिलों कांचीपुरम, रानीपेट, तिरुपत्तूर, मयिलादुथुरई, तेनकासी और पेरंबलूर में अभी तक सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां नए सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएं।

उन्होंने यह भी मांग की कि जिन 16 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वर्तमान में केवल 100 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है, उनमें प्रत्येक में 50 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटें बढ़ाई जाएं। उनका कहना है कि सरकारी कोटा सीटों के नुकसान की भरपाई करने और सस्ती चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए यह विस्तार आवश्यक है।

अन्य ख़बरें

-20 पेट्रोल पर अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों से मांगा जवाब, पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा और मुआवजे पर उठाए सवाल

Newsdesk

बिहार: बांकीपुर उपचुनाव लड़ने को लेकर एआईएमआईएम का सस्पेंस बरकरार, ओवैसी लेंगे अंतिम निर्णय

Newsdesk

बारुईपुर एनकाउंटर: पीड़िता के पिता ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई के लिए सीएम सुवेंदु अधिकारी को दिया धन्यवाद

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading