नई दिल्ली, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को संसद के मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) के सदस्यों को बुलाने के केंद्र सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को वॉकआउट करने का पूरा अधिकार है लेकिन 20 चुने हुए सांसदों को चर्चा से बाहर रखना सही नहीं होता। यह घटनाक्रम तब हुआ जब ‘इंडिया’ ब्लॉक ने केंद्र द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट किया। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी गुट नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के सदस्यों की मौजूदगी का विरोध किया था।
वॉकआउट के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए रिजिजू ने कहा, “वह बहिष्कार कुछ समय के लिए था; यह औपचारिक था। मुझे नहीं लगता कि यह बुरा है क्योंकि उन्हें अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। एनसीपीआई के 20 लोकसभा सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं और लोकसभा अध्यक्ष से नई पार्टी में शामिल होने और संसद में अलग बैठने की मांग की है। यह नियमों के अनुसार है और यह अध्यक्ष के विचाराधीन है।”
20 सांसदों के महत्व पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा, “जब यह मामला अध्यक्ष के विचाराधीन है और 20 सांसद हैं, तो हम उन्हें कैसे वंचित कर सकते हैं? लोकसभा सभी की है तो हम 20 सांसदों को नहीं बुलाएंगे; ऐसा कैसे हो सकता है? उन्हें मान्यता देना या न देना एक प्रक्रिया है। लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय से जो भी होगा, उस पर मैं अभी कोई टिप्पणी नहीं कर रहा हूं।”उन्होंने कहा कि सरकार ने संसद में प्रतिनिधित्व करने वाली सभी पार्टियों को आमंत्रित किया था और एनसीपीआई को कोई विशेष निमंत्रण नहीं भेजा था।


