जबलपुर। नगर निगम में कुछ दिन पहले बड़ी संख्या में अधिकारियों और सीएसआई (सैनिटरी इंस्पेक्टर) के तबादले किए गए थे। उम्मीद जताई जा रही थी कि नई पदस्थापनाओं से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार होगा, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर, जलभराव और आवारा पशुओं की मौजूदगी स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
जानकारी के अनुसार, जिन सीएसआई का हाल ही में तबादला हुआ है, उनमें से कई को अभी अपने नए वार्डों की पूरी जानकारी तक नहीं है। एक सीएसआई ने चर्चा के दौरान बताया कि उन्हें नए वार्ड में आए अभी केवल एक दिन हुआ है और उन्हें यह भी पता नहीं कि किस क्षेत्र में सबसे अधिक गंदगी की समस्या है। उन्होंने कहा कि वार्ड की जानकारी के लिए सुपरवाइजर से संपर्क किया जाए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना पर्याप्त तैयारी के किए गए तबादलों से आखिर सफाई व्यवस्था को कितना लाभ मिला।
शहर के अंधेरदेव मस्जिद के सामने स्थित एक निजी ट्रस्ट की जमीन पर बड़ी मात्रा में कचरा फैला हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां लंबे समय से गंदगी बनी रहती है। बारिश का पानी जमा होने से बदबू फैल रही है और आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे क्षेत्रवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसी तरह नया मोहल्ला स्थित मस्जिद रोड और हितकारिणी कॉलेज के आसपास भी सफाई व्यवस्था बदहाल दिखाई दी। सड़कों और खाली स्थानों पर फैली गंदगी नगर निगम के स्वच्छता अभियान और स्मार्ट सिटी के दावों को चुनौती देती नजर आ रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल अधिकारियों के तबादले कर देने से व्यवस्था नहीं सुधरती, बल्कि नए अधिकारियों को क्षेत्र की जानकारी, पर्याप्त संसाधन और जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी होगी। लोगों ने नगर निगम से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सफाई अभियान चलाने और नियमित निगरानी की मांग की है।


