जबलपुर। मध्यप्रदेश विधानसभा में मप्र राजमार्ग (संशोधन) विधेयक-2026 पारित हो गया। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि संशोधन लागू होने के बाद राज्य में राजमार्गों के निर्माण और विकास के लिए वित्तीय संसाधनों की कमी नहीं आएगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान टोल कानून वर्ष 1851 में अंग्रेजों के शासनकाल में बनाए गए थे, जो आज की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हैं। इसी कारण महाराष्ट्र मॉडल की तर्ज पर संसाधन जुटाने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़ी सड़क परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन लाया गया है। सड़क निर्माण, विस्तार और रखरखाव के लिए पर्याप्त फंडिंग सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य का अपना प्रभावी अधिनियम नहीं होगा तो भविष्य की परियोजनाओं के संचालन में कठिनाइयाँ आएंगी।
संशोधित अधिनियम के तहत राज्य सरकार आवश्यकतानुसार किसी भी सड़क को राज्य राजमार्ग घोषित कर सकेगी। साथ ही उनके विकास, निर्माण और रखरखाव के लिए निजी या अन्य संस्थाओं के साथ समझौता करने का अधिकार भी सरकार को मिलेगा।
राकेश सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में कई महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें भोपाल-मंदसौर एक्सप्रेस-वे (11,550 करोड़ रुपये), सागर-सतना एक्सप्रेस-वे (9,850 करोड़ रुपये) और जबलपुर-आशापुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे (17,050 करोड़ रुपये) प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का चयन पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म के वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर किया जा रहा है, जिससे कम दूरी, कम लागत और कम समय में बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराया जा सके। मंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में देश में हुए सड़क अवसंरचना विकास की भी सराहना की।


