प्रहलाद गुप्ता कोतमा क्षेत्र अन्तर्गत नगर पालिका परिषद पसान के मुख्य बाजार में बैठकी शुल्क की वसूली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि उनसे नियमित रूप से बैठकी शुल्क के नाम पर नकद राशि वसूली जा रही है, लेकिन उसके बदले कोई आधिकारिक रसीद या पावती नहीं दी जा रही। इस स्थिति ने वसूली प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है और व्यापारियों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि बैठकी शुल्क नगर पालिका परिषद पसान के नियमों के तहत वैध रूप से वसूला जा रहा है, तो प्रत्येक भुगतान की रसीद देना अनिवार्य होना चाहिए। बिना किसी दस्तावेज के नकद राशि लिए जाने से यह संदेह उत्पन्न हो रहा है कि वसूली की धनराशि का समुचित लेखा-जोखा रखा भी जा रहा है या नहीं।
व्यापारियों ने प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि यह सरकारी शुल्क है तो रसीद क्यों नहीं दी जा रही? बिना रसीद नकद वसूली किस अधिकारी के निर्देश पर की जा रही है? वसूली गई राशि नगर पालिका परिषद पसान के किस खाते या मद में जमा हो रही है? इन सवालों का स्पष्ट उत्तर अब तक सामने नहीं आया है।
स्थानीय व्यापारिक संगठनों और दुकानदारों ने नगर पालिका परिषद पसान के जिम्मेदार अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बैठकी शुल्क की वसूली किसी अधिकृत ठेका प्रणाली के माध्यम से की जा रही है, तो उससे संबंधित नियम, अनुबंध और वसूली प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए। वहीं यदि वसूली में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैधता पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
व्यापारियों का कहना है कि नगर पालिका की राजस्व वसूली पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए, ताकि आम व्यापारियों का विश्वास बना रहे और भविष्य में इस प्रकार के विवादों की स्थिति उत्पन्न न हो।


