सांसद श्रीमती भारती पारधी ने दी विमध्यप्रदेश शासन की महत्वकांक्षी मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना’ के अंतर्गत बालाघाट जिले के 196 चयनित तीर्थयात्री भगवान श्रीकृष्ण की पावन नगरी मथुरा-वृंदावन की तीर्थयात्रा के लिए उत्साह और उमंग के साथ रवाना हुए। यह विशेष तीर्थ ट्रेन 25 जुलाई 2026 को प्रातः 11:30 बजे बालाघाट रेलवे स्टेशन से अपने गंतव्य के लिए रवाना हुई। स्टेशन पर आयोजित एक सादे और गरिमामयी समारोह में जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने यात्रियों का भव्य स्वागत कर उन्हें मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं।
बालाघाट-सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती भारती पारधी ने रेलवे स्टेशन पर उपस्थित तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि”मध्य प्रदेश सरकार हमारे वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को सुगम और उनकी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के जो माता-पिता और बुजुर्ग आर्थिक तंगी या अन्य कारणों से अपने स्वखर्च पर तीर्थयात्रा करने में असमर्थ हैं, उन्हें ‘मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना’ के माध्यम से देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। यह योजना हमारी संस्कृति, आस्था और बुजुर्गों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता का अनूठा उदाहरण है। आप सभी पूरी श्रद्धा और प्रसन्नता के साथ यात्रा करें तथा हमारे बालाघाट जिले और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली के लिए भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करें।
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती भारती सुरजीत सिंह ठाकुर, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य श्रीमती मौसम बिसेन, श्री रमेश रंगवानी, श्री गणेश अग्रवाल, नगर पालिका के पार्षद, अन्य गणमान्य नागरिक, संयुक्त कलेक्टर श्री राहुल नायक, एसडीएम श्री गोपाल सोनी और अन्य अधिकारियों ने मिलकर तीर्थयात्रियों की अगवानी की और विदाई दी।
यह विशेष ट्रेन बालाघाट से प्रस्थान कर नैनपुर, जबलपुर और कटनी के रास्ते मथुरा-वृंदावन पहुंचेगी। इस ट्रेन में मंडला, जबलपुर और कटनी जिले के तीर्थयात्री भी सवार होंगे। तीर्थयात्रा पूर्ण करने के पश्चात यही विशेष ट्रेन 28 जुलाई को दोपहर 3:00 बजे वापस बालाघाट रेलवे स्टेशन लौटेगी।
मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के तहत यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। शासन द्वारा यात्रा के दौरान सुरक्षित रेल यात्रा, ठहरने के लिए आवास, शुद्ध भोजन और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय व रसद व्यवस्थाएं पूरी तरह निःशुल्क सुनिश्चित की गई हैं, ताकि श्रद्धालु बिना किसी आर्थिक बोझ या चिंता के पूरी श्रद्धा के साथ अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा का आनंद ले सकें।


