जबलपुर/नरसिंहपुर। सुआतला थाना क्षेत्र में हुए चर्चित पांच लोगों के सामूहिक हत्याकांड में गिरफ्तार स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल के संचालक डॉ. अमित खरे के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महानद्दा स्थित उसके अस्पताल को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। जिला प्रशासन, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने अस्पताल पहुंचकर जांच की और कार्रवाई की।
गोरखपुर एसडीएम अनुराग सिंह ने बताया कि प्रशासनिक निर्देशों के पालन में संयुक्त टीम द्वारा अस्पताल का निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
पुलिस जांच में सामने आया है कि डॉ. अमित खरे का आपराधिक इतिहास पहले से रहा है। वह वैदिका हत्याकांड में दोषसिद्ध होकर दो वर्ष की सजा काट चुका है। इसके अलावा बीमा क्लेम में कथित फर्जीवाड़ा, एम्बुलेंस संचालकों के साथ मारपीट और धमकी, मरीजों को जबरन अपने अस्पताल लाने तथा इलाज और पैसों के विवाद से जुड़े मामलों में भी उसका नाम सामने आता रहा है।
पूछताछ में हुआ सनसनीखेज खुलासा
नरसिंहपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार आठ आरोपियों से पूछताछ में दावा किया गया कि डॉ. अमित खरे ने मुख्य आरोपी और हाईवा चालक आनंद सिंह लोधी से कहा था कि वाहन इस तरह चढ़ाया जाए कि पिछले पहिए से कुचलकर हत्या हो और मामला सड़क दुर्घटना जैसा दिखाई दे।
पुलिस के अनुसार, डॉ. अमित खरे और मृतक राजेन्द्र पटेल के बीच पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। वहीं आनंद सिंह का भी राजेन्द्र पटेल से पुराना विवाद था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी कारण दोनों ने कथित रूप से हत्या की साजिश रची।
आठ गिरफ्तार, तीन आरोपी अब भी फरार
अब तक इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अनिल, ऋतुराज और प्रीतम अभी भी फरार हैं। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त हाईवा, अन्य वाहन और मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। जांच में सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने के लिए दो हाईवा अलग-अलग स्थानों पर तैनात किए गए थे और मृतकों की रेकी के आधार पर घटना को अंजाम दिया गया।
राजनीतिक संरक्षण के एंगल की भी जांच
जांच अब केवल हत्या की साजिश तक सीमित नहीं है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि आरोपियों को किसी राजनीतिक संरक्षण का लाभ तो नहीं मिला। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि वारदात से पहले आरोपियों के बीच लगातार संपर्क था और मृतकों की लोकेशन मोबाइल के माध्यम से साझा की जा रही थी। पूछताछ के दौरान कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
हालांकि, अभी तक किसी भी राजनीतिक व्यक्ति की संलिप्तता आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इतने सुनियोजित तरीके से की गई वारदात के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका प्रमाणित होती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


