जबलपुर। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, भगवान विष्णु की आराधना तथा धार्मिक कार्य करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि का भी विश्वास है। प्रत्येक माह की पूर्णिमा शुभ मानी जाती है, लेकिन आषाढ़ माह की पूर्णिमा का महत्व सबसे अधिक होता है। इसे गुरु पूर्णिमा अथवा व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
इस दिन महर्षि वेदव्यास जी की जयंती मनाई जाती है। महर्षि वेदव्यास को वेदों के संकलन और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना का श्रेय प्राप्त है। इसलिए इस दिन गुरुजनों का पूजन, सम्मान और आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा है।
पूर्णिमा तिथि और शुभ मुहूर्त
आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तिथि का आरंभ 28 जुलाई 2026 को शाम 5:31 बजे होगा तथा इसका समापन 29 जुलाई 2026 को शाम 7:03 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी।
स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4:46 बजे से 5:30 बजे तक रहेगा। इस दिन प्रीति योग और आयुष्मान योग का शुभ संयोग भी रहेगा, जिन्हें मांगलिक एवं शुभ फलदायी माना गया है।
ज्योतिषाचार्य पं. सौरभ दुबे के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरु, माता-पिता, शिक्षकों एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शकों का सम्मान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है। इस दिन पीले वस्त्र, फल, अन्न, दक्षिणा तथा धार्मिक ग्रंथों का दान करने से विशेष शुभ फल प्राप्त होते हैं। भगवान विष्णु और महर्षि वेदव्यास की पूजा-अर्चना करने तथा गुरु मंत्र का जप करने से ज्ञान, बुद्धि, सफलता और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गुरु का आशीर्वाद व्यक्ति के जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।


