जबलपुर। श्रावण मास के दूसरे सोमवार को निकलने वाली ऐतिहासिक संस्कार कांवड़ यात्रा इस बार गंभीर समस्याओं के बीच शुरू होने जा रही है। गौरीघाट से खमरिया स्थित कैलाश धाम तक निकाली जाने वाली इस यात्रा में हर साल 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु नंगे पैर शामिल होते हैं और यह परंपरा पिछले 16 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। इस पूरी यात्रा के दौरान शिव भक्त 35 किलोमीटर का लंबा रास्ता पैदल तय करते हैं, जिसमें एक हाथ में पवित्र नर्मदा जल और दूसरे हाथ में पौधा लेकर वे आगे बढ़ते हैं और अंत में भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। लेकिन इस बार गौरीघाट से खमरिया तक के पूरे मार्ग पर फैली बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी ने कांवड़ियों की राह बेहद कठिन कर दी है। शहर के कई प्रमुख रास्तों पर अमृत योजना के तहत चल रहे अधूरे कामों और बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दीं।
सड़कों पर बिखरे गहरे गड्ढे और नुकीली गिट्टियां
गौरीघाट से रेतनाका, रामपुर चौक, आदिगुरु शंकराचार्य चौक, शास्त्री ब्रिज, तीन पत्ती चौक, आंबेडकर चौक, घमापुर और खमरिया चौक होते हुए कैलाश धाम तक पहुंचने वाले इस मार्ग पर स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। गौरीघाट रोड पर कई स्थानों पर डामर पूरी तरह उखड़ चुका है और सड़कों पर नुकीली गिट्टियां बाहर आ गई हैं। रामपुर चौक से आगे चांदीमाता मंदिर और बादशा हलवाई मंदिर के पास सड़क पर खतरनाक गड्ढे बन चुके हैं, जिनसे गुजरना राहगीरों और कांवड़ियों के लिए बड़ा जोखिम भरा साबित हो रहा है। आदर्श नगर और रामपुर क्षेत्र में भी बीच सड़क पर बड़े गड्ढे हादसों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं।
अमृत योजना के कार्यों से बढ़ी भारी कीचड़
अमृत योजना के तहत शहर में विभिन्न स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यों के कारण सड़कों की हालत और अधिक दयनीय हो गई है। कांचघर और रांझी मार्ग पर भूमिगत कार्यों के लिए की गई अनियोजित खुदाई के बाद मिट्टी और कीचड़ का बड़ा अंबार लग गया है। बारिश के मौसम में यह कीचड़ पानी के साथ मिलकर रास्ते को पूरी तरह संकरा और अत्यधिक फिसलन भरा बना देता है। आंबेडकर चौक से घमापुर मार्ग की तरफ जाने वाले मुख्य मार्ग के भी हाल बेहाल हैं, जहां पेट्रोल पंप के सामने और व्योहारबाग स्कूल की तरफ डामर का नामोनिशान नहीं बचा है और हर तरफ गहरे गड्ढे हैं।
नंगे पैर चलने वाले भक्तों की बढ़ी परेशानी
मटामर स्थित कैलाश धाम से गौरीघाट तक का यह 35 किलोमीटर का सफर कांवड़ियों की गहरी और अटूट आस्था का प्रतीक है। हालांकि, यात्रा शुरू होने से ठीक पहले सड़कों की उचित मरम्मत न होने और उभरी हुई नुकीली गिट्टियों को न हटाने के कारण श्रद्धालुओं को पैरों में गंभीर चोट लगने का भारी अंदेशा बना हुआ है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इन गड्ढों को भरकर मार्ग को दुरुस्त नहीं किया गया, तो इस पावन यात्रा के दौरान हजारों भक्तों को अनावश्यक पीड़ा और कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए।


