शहडोल 18 अगस्त 2026- कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने ग्रामीण आजीविका मिशन की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जिले के प्रत्येक क्लस्टर में स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर चयनित आयमूलक गतिविधियों से स्व-सहायता समूहों को जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को केवल समूह गठन तक सीमित न रखते हुए उन्हें स्थायी और लाभकारी आजीविका गतिविधियों से जोड़ना सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्टर ने जिले में कोदो-कुटकी उत्पादन एवं प्रसंस्करण, सब्जी उत्पादन, डेयरी विकास, हल्दी उत्पादन एवं प्रोसेसिंग तथा बांस व्यवसाय जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों के लिए स्व-सहायता समूहों को आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराने के साथ उत्पादों के लिए बेहतर बाजार सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने प्रत्येक क्लस्टर की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त गतिविधि का चयन कर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही समूहों को गतिविधि के अनुसार आवश्यक प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
कलेक्टर ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और प्रभावी मार्केटिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि स्व-सहायता समूहों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके और महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि हो।
उन्होंने उत्पादों को सीधे बाजार से जोड़ने तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को मजबूत आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जाए।
बैठक में जिला समन्वयक एन आर एल एम श्री अजय सिंह सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।


