कोतमा। कोतमा नगर के वरिष्ठ, समर्पित जनसेवक और अपने अटल सिद्धांतों के लिए पहचाने जाने वाले लोकतंत्र सेनानी चंद्रशेखर चतुर्वेदी का इलाज के दौरान रायपुर में निधन हो गया। वे विगत कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका पार्थिव शरीर कोतमा पहुंचते ही संपूर्ण क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। 4 सितंबर 2026 को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में नागरिकों और गणमान्य जनों ने उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी।चंद्रशेखर चतुर्वेदी एक निर्भीक व्यक्तित्व के धनी थे, नगर हित में उनकी सबसे बड़ी और ऐतिहासिक देन कोतमा में केवई नदी का पानी लाना माना जाता है।जब कोतमा में भीषण जल संकट था उनके इस दृढ संकल्प और जन-आंदोलन के आगे तत्कालीन प्रशासन को झुकना पड़ा, जिसके फलस्वरूप योजना धरातल पर उतरी।
दिवंगत जनसेवक की अंतिम यात्रा में उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे से लपेटा गया। अनूपपुर जिला पुलिस बल द्वारा उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी गई।अंतिम यात्रा में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री दिलीप जायसवाल, जयसिंहनगर विधायक व पूर्व मंत्री जयसिंह मरावी, मीसा बंदी मूलचंद अग्रवाल, एन. डी. शुक्ला, शिवकुमार नामदेव सहित भारी संख्या में आमजन मौजूद रहे।
उनके निधन से कोतमा ने अपना एक सच्चा अभिभावक और सिद्धांतों का धनी व्यक्तित्व खो दिया है।


