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September 10, 2026
सी टाइम्स
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40 नए CNG कचरा वाहन जुड़े, छह महीने में 100 और का लक्ष्य, फिर भी कई इलाकों में 4-5 दिन तक नहीं पहुंचती कचरा गाड़ी

जबलपुर। शहर की डोर-टू-डोर कचरा संग्रह व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जबलपुर नगर निगम ने अपने बेड़े में 40 नए CNG कचरा वाहन शामिल किए हैं। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और निगम अधिकारियों ने इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर अलग-अलग वार्डों के लिए रवाना किया। नगर निगम का दावा है कि नए वाहन ईंधन खर्च और वाहनजनित प्रदूषण कम करने के साथ संकरी गलियों तक नियमित कचरा संग्रह में मदद करेंगे। अगले छह महीनों में करीब 100 और वाहन जोड़ने का लक्ष्य भी बताया गया है।

यह पहल महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा है—जब नगर निगम के पास पहले से कचरा संग्रह के लिए बड़ा वाहन बेड़ा मौजूद है, तो शहर के कई क्षेत्रों में आज भी लोगों को कचरा गाड़ी के लिए कई दिनों तक इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?

शहर के विभिन्न इलाकों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि डोर-टू-डोर कचरा वाहन प्रतिदिन नहीं पहुंचते। कुछ क्षेत्रों में नागरिकों का कहना है कि गाड़ी चार से पांच दिन के अंतराल के बाद आती है। इस दौरान घरों में जमा गीला और सूखा कचरा बदबू और गंदगी की समस्या पैदा करता है। कई लोग मजबूरी में कचरा खाली प्लॉट, सड़क किनारे या नालियों के पास फेंक देते हैं, जो बाद में नालियां चोक होने, मच्छर बढ़ने और जलभराव जैसी समस्याओं का कारण बनता है।

ऐसे में नए वाहनों की संख्या बढ़ाना समाधान का एक हिस्सा जरूर है, लेकिन व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि हर वाहन रोज तय रूट पर चले, निर्धारित समय पर पहुंचे और हर घर से कचरा उठे।

संकरी गलियां और बाहरी इलाके बड़ी चुनौती

स्थानीय स्तर पर सबसे अधिक परेशानी घनी आबादी वाले पुराने मोहल्लों, संकरी गलियों और शहर के बाहरी क्षेत्रों में सामने आती है। कई जगह बड़े वाहन मुख्य सड़कों तक ही सीमित रह जाते हैं और अंदरूनी हिस्सों में कचरा लंबे समय तक जमा रहता है।

नगर निगम का कहना है कि नए CNG वाहन ऐसे क्षेत्रों में कचरा संग्रह को बेहतर बनाएंगे। लेकिन इसके लिए केवल वाहन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। वार्डवार रूट प्लानिंग, वाहन मेंटेनेंस, GPS आधारित निगरानी और वैकल्पिक व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।

यदि किसी वार्ड का वाहन खराब हो जाए तो उसी दिन दूसरा वाहन भेजने की व्यवस्था क्या है? अगर किसी क्षेत्र में कचरा नहीं उठा तो क्या इसकी डिजिटल रिकॉर्डिंग होती है? क्या सुपरवाइजर से जवाब मांगा जाता है? यही सवाल व्यवस्था की जवाबदेही तय करते हैं।

कचरा पृथक्करण भी बड़ी चुनौती

नई कचरा प्रबंधन व्यवस्था में केवल कचरा उठाना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि घर से निकलने वाले कचरे का स्रोत पर पृथक्करण भी जरूरी है। गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग-अलग रखने और उसके वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था प्रभावी तभी होगी जब डोर-टू-डोर कलेक्शन नियमित हो।

यदि नागरिक घर में कचरा अलग भी करते हैं, लेकिन गाड़ी कई दिनों तक नहीं आती या बाद में अलग-अलग कचरे को एक ही वाहन में मिला दिया जाता है, तो पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।

वाहन संख्या नहीं, नियमित सेवा होगी असली परीक्षा

नगर निगम द्वारा 40 नए CNG वाहनों को शामिल करना और भविष्य में 100 अतिरिक्त वाहन जोड़ने का लक्ष्य सफाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम है। CNG आधारित वाहनों से डीजल की तुलना में प्रदूषण और संचालन लागत में कमी की उम्मीद भी की जा रही है।

लेकिन इस पहल की सफलता उद्घाटन या वाहनों की कुल संख्या से नहीं मापी जाएगी। इसकी असली परीक्षा तब होगी जब शहर के हर वार्ड, हर कॉलोनी और हर गली में नागरिक को रोजाना कचरा संग्रह की सुविधा मिले।

नगर निगम को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नए वाहन केवल मुख्य मार्गों या चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित न रहें। करमेटा, डुमना, रांझी सहित शहर के बाहरी हिस्सों और पुराने घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी कचरा संग्रह समान रूप से प्रभावी होना चाहिए।

नागरिक कहां करें शिकायत?

कचरा गाड़ी नहीं आने, खुले में कचरा जमा होने या सफाई से जुड़ी शिकायतें नागरिक नगर निगम की मेयर हेल्पलाइन पर दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा स्वच्छता से संबंधित मोबाइल प्लेटफॉर्म पर फोटो और स्थान की जानकारी के साथ शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

शिकायत करते समय वार्ड, मोहल्ला, गली, कचरा वाहन न आने की तारीख और फोटो या वीडियो जैसी जानकारी देना उपयोगी हो सकता है। इससे शिकायत की निगरानी और संबंधित वार्ड की जवाबदेही तय करना आसान होगा।

नए CNG वाहन निश्चित रूप से नगर निगम के संसाधन बढ़ाएंगे, लेकिन जबलपुर की सफाई व्यवस्था का असली सवाल अब वाहन संख्या नहीं बल्कि सेवा की नियमितता और जवाबदेही है।

क्योंकि स्वच्छ शहर का प्रमाण बेड़े में खड़ी सैकड़ों गाड़ियां नहीं, बल्कि हर सुबह नागरिक के दरवाजे तक पहुंचने वाली कचरा गाड़ी है।

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