जबलपुर। जिले की सिहोरा तहसील के टिकरिया और प्रतापपुर स्थित लौह अयस्क खदानों में वर्ष 2004 से 2017 के बीच कथित तौर पर निर्धारित सीमा से अधिक खनन के मामले में मेसर्स आनंद माइनिंग कॉरपोरेशन को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। हालांकि, अदालत ने कंपनी पर कोई अंतिम जुर्माना निर्धारित नहीं किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतिम देयता अभी कलेक्टर जबलपुर द्वारा तय की जानी है।
न्यायमूर्ति आनंद पाठक एवं न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की युगलपीठ ने 8 सितंबर 2026 को रिट याचिका क्रमांक 37146/2026 पर आदेश पारित किया। अदालत ने कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा गठित जांच समिति और उसके आधार पर शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कलेक्टर को कंपनी का पक्ष और आपत्तियां सुनकर कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने तथा चार माह के भीतर प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
कंपनी की ओर से कहा गया था कि वह सिहोरा तहसील के टिकरिया और प्रतापपुर गांवों में लौह अयस्क खदानों का संचालन माइनिंग लीज के आधार पर कर रही थी। राज्य सरकार ने 23 अप्रैल 2025 को खदानों के निरीक्षण एवं कथित अतिरिक्त उत्खनन की जांच के लिए समिति गठित की थी। समिति ने वर्ष 2004 से 2017 के बीच निर्धारित सीमा से अधिक खनन किए जाने संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसमें टिकरिया खदान के लिए 1,13,81,94,280 रुपये तथा प्रतापपुर खदान के लिए 1,20,69,41,910 रुपये की वसूली प्रस्तावित की गई। कंपनी ने जांच समिति के गठन तथा उसकी रिपोर्ट की वैधानिकता को चुनौती देते हुए कहा था कि समिति का गठन उचित कानूनी अधिकार के बिना किया गया और उसकी रिपोर्ट को एमएमडीआर एक्ट की धारा 21(5) के तहत कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।
राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि कलेक्टर के समक्ष कार्यवाही अभी लंबित है और कंपनी को अपना पक्ष रखने के पर्याप्त अवसर दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने इस स्तर पर हस्तक्षेप से इनकार करते हुए मामला कलेक्टर के समक्ष कानून के अनुसार तय करने के निर्देश दिए।


