जबलपुर। मध्य प्रदेश में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन को लेकर दायर पांच जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से ताजा स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने सरकार को रिपोर्ट पेश करने के लिए चार दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि जबलपुर में फायर सेफ्टी और नगर निगम की आवश्यक अनुमति के बिना भी निजी अस्पतालों को पंजीयन दिए जा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि शहर में करीब 160 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हैं। इनमें से 63 का पंजीयन वर्ष 2019 से 2021 के बीच किया गया।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नए अस्पतालों के पंजीयन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है। कथित तौर पर अस्पतालों का भौतिक सत्यापन किए बिना ऑनलाइन आवेदन और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन जारी किए गए। याचिकाओं में यह भी सवाल उठाया गया है कि फायर सेफ्टी प्रमाण-पत्र और नगर निगम की जरूरी अनुमति के अभाव में अस्पतालों का पंजीयन किस आधार पर किया गया।
सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने ताजा स्थिति से अवगत कराने के लिए चार दिन का समय मांगा। कोर्ट ने समय देते हुए निर्देश दिया कि स्टेटस रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाएं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा और अमिताभ गुप्ता ने पैरवी की। अब 12 अक्टूबर की सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।


