जबलपुर। अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के तत्वावधान में राष्ट्रीय महामंत्री जय सचदेवा और जिला अध्यक्ष संदीप शुक्ला के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गोरखपुर, अधारताल और रांझी तहसील में कार्यरत अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षित बैठक व्यवस्था सहित आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि तहसील कार्यालयों में दलालों की सक्रियता के कारण भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि कुछ दलाल बिल्डरों से सांठगांठ कर बिना अधिवक्ता और आवेदक की मौजूदगी के नामांतरण आदेश करवाने में भूमिका निभा रहे हैं। मंच ने ऐसे लोगों पर प्रभावी अंकुश लगाने और भ्रष्टाचार रोकने की मांग की।
अधिवक्ताओं ने प्रशासन को मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया है। उनका कहना है कि आम जनता को न्याय मिल सके और अधिवक्ता भी अपना कार्य सुचारु रूप से कर सकें, इसके लिए प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। मंच ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर न्यायहित में आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
ज्ञापन के दौरान रजनीश यादव, अधिवक्ता मनमोहन चतुर्वेदी, देवाशीष यादव, अजय शुक्ला, रजनीश उपाध्याय, सोनू श्रीवास्तव, अनुशंकर सोनकर, जितेंद्र चिमनानी, महेंद्र प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
पुलिस-अधिवक्ता विवादों को लेकर एसपी को भी ज्ञापन
अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच की जबलपुर शाखा ने पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच विवाद की घटनाओं को लेकर पुलिस अधीक्षक को भी ज्ञापन सौंपा। मंच का कहना है कि कई मामलों में अधिवक्ता अपने पक्षकारों के वैधानिक हितों और अधिकारों से संबंधित जानकारी अथवा कार्रवाई के लिए पुलिस थानों में पहुंचते हैं। ऐसे में संवाद और व्यवहार में संयम नहीं रहने पर अनावश्यक विवाद की स्थिति बन जाती है।
अधिवक्ताओं ने कुछ मामलों में पुलिस कर्मचारियों द्वारा असम्मानजनक व्यवहार और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल की शिकायत भी रखी। मंच ने कहा कि पुलिस और अधिवक्ता दोनों ही न्याय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पक्ष हैं। इसलिए आपसी सम्मान, सहयोग और संवाद की भावना बनाए रखना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ने से रोका जा सके।


