25 अक्टूबर को मनाया जाएगा शरद पूर्णिमा पर्व, खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत के लिए दिन शुभ
जबलपुर। इस वर्ष शरद पूर्णिमा का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाया जाएगा। 25 अक्टूबर, रविवार को पड़ रही शरद पूर्णिमा पर हर्षण योग, वज्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग पर्व के महत्व को और बढ़ाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महालक्ष्मी योग में देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 25 अक्टूबर रविवार को सुबह 10:40 बजे होगा और इसका समापन 26 अक्टूबर को सुबह 9:40 बजे होगा। उदय तिथि और धार्मिक परंपराओं के अनुसार शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
अश्विन मास की पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो भक्त जागरण कर श्रद्धापूर्वक देवी की आराधना करते हैं, उन पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। मान्यता के अनुसार, इस वर्ष महालक्ष्मी योग में पूजा का विशेष अवसर प्राप्त हो रहा है। इसे सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक उन्नति की कामना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और शुभ कार्य
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस दिन चंद्रमा मीन एवं मेष राशि तथा मंगल कर्क राशि में रहेगा। पूर्णिमा तिथि और शुभ योगों को देखते हुए खरीदारी, निवेश, संपत्ति से जुड़े कार्य और नए व्यवसाय की शुरुआत को शुभ माना जा रहा है। नौकरीपेशा और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी यह दिन नई योजनाएं बनाने, महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने और भविष्य की योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिहाज से अनुकूल माना गया है। हालांकि, वास्तविक लाभ संबंधित परिस्थितियों और निर्णयों पर निर्भर करेगा।
शरद पूर्णिमा पर क्या करें
धार्मिक परंपरा के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में कुछ समय बिताना और मां लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मकता का संचार होता है। इस अवसर पर घर के बाहर दीपक जलाने, रात्रि जागरण करने और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी प्रचलित है।
कई परिवारों में इस रात खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत खोलते हैं। शरद पूर्णिमा पर औषधियों के सेवन और चांदनी में बैठने को लेकर भी पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं, हालांकि इनके विशेष स्वास्थ्य लाभ वैज्ञानिक रूप से सुनिश्चित नहीं हैं।
इस प्रकार शरद पूर्णिमा का पर्व धार्मिक आस्था, चंद्र उपासना और मां लक्ष्मी की आराधना के साथ मनाया जाएगा। श्रद्धालु इस अवसर पर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे।


