जबलपुर। शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर निगम नए वाहनों की खरीदी पर जोर दे रहा है, लेकिन दूसरी ओर वाहनों के रखरखाव और मरम्मत की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। स्थिति यह है कि प्रतिदिन करीब 20 से 30 टिपर खराब होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में घरों से कचरा उठाने की व्यवस्था प्रभावित होने और कई क्षेत्रों में कचरा गाड़ियों के नियमित नहीं पहुंचने का खतरा बना रहता है। वाहनों की संख्या बढ़ाने की कवायद के बीच निगम की वर्कशॉप को आधुनिक सुविधाओं से लैस नहीं किए जाने का मुद्दा भी अहम हो गया है। नगर निगम के सामने चुनौती केवल नए वाहन खरीदने की नहीं, बल्कि उन्हें लगातार परिचालन योग्य बनाए रखने की भी है। यदि पर्याप्त मरम्मत सुविधाएं, प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी और जरूरी स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं हैं, तो वाहनों के खराब होने पर उन्हें दोबारा सड़क पर उतारने में देरी हो सकती है। इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ता है।
आंकड़े बता रहे व्यवस्था की चुनौती
नगर निगम के वाहन बेड़े और वर्कशॉप की स्थिति को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार:
– 20–30 टिपर रोजाना खराब: वर्तमान में आपके उपलब्ध कराए गए आंकड़े के अनुसार।
नगर निगम के पास कुल लगभग 450 वाहन थे।
– डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में 52 सीएनजी वाहन लगाए गए थे।
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– प्रतिदिन 20–25 गाड़ियां खराब रहने की जानकारी भी दी गई थी।
दो से तीन वाहन नहीं पहुंच रहे वार्ड में
जानकारी के अनुसार प्रत्येक वार्ड मेंदो से तीन वाहन ही कचरा संग्रहण के कार्य में पहुंच पाते हैं। वार्डों की सीमा और आबादी को देखकर एक वार्ड में लगभग चार वाहनों की आवश्यकता है लेकिन रोजाना वाहनों में आ रही खराबी के कारण शहर के 79 वार्डों में कचरा संग्रहण के लिए वाहनों की कमी के चलते निगम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो रही है।


