September 16, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

अविवाहित महिला को दिल्ली हाईकोर्ट ने नहीं दी गर्भपात की इजाजत, अब सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार

नई दिल्ली ,19 जुलाई (आरएनएस)। गर्भपात कराने की इजाजत नहीं देने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अविवाहित महिला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मंगलवार को महिला की ओर से अधिवक्ता अमित मिश्रा एससी में पेश हुए और आज तत्काल सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले की जानकारी दी।
दिल्ली हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने गर्भपात की अनुमति मांगने वाली महिला की याचिका पर सुनवाई की थी। बेंच ने सुझाव दिया था कि याचिकाकर्ता को बच्चे को जन्म देने तक कहीं सुरक्षित रखा जाए और उसके बाद बच्चे को गोद दिया जा सकता है। गोद लेने के लिए लोगों की लंबी कतार है।
बच्चे की हत्या करने की नहीं देंगे इजाजत : हाईकोर्ट
अदालत ने कहा कि 36 सप्ताह के गर्भावस्था के लगभग 24 हफ्ते पूरे हो गए हैं। ऐसे में हम आपको बच्चे की हत्या करने की अनुमति नहीं देंगे। हम माफी चाहते हैं। यह असल में भ्रूण हत्या करने के समान होगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, आप अपने मुवक्किल से पूछिए। भारत सरकार या दिल्ली सरकार या कोई अच्छा अस्पताल पूरी जिम्मेदारी उठाएगा। मैं भी मदद करने की पेशकश कर रहा हूं।
मानसिक पीड़ा का सामना कर रही अविवाहित महिला
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि महिला अविवाहित होने के कारण बहुत मानसिक पीड़ा में है और वह बच्चे का लालन-पालन करने की स्थिति में नहीं है। वकील ने यह भी कहा कि अविवाहित महिलाओं के गर्भपात कराने में कानून में रोक भेदभावपूर्ण है। इस पर एचसी ने कहा कि वह याचिकाकर्ता को बच्चे का लालन-पालन करने पर मजबूर नहीं कर रहा है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उनका प्रसव अच्छे अस्पताल में हो। आपके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं मिलेगी। बच्चे को जन्म दीजिए।

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