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अतुल सुभाष – पत्नी और न्याय व्यवस्था से परेशान की आत्महत्या, 40 पन्नों का लिखा सुसाइड नोट

Atul Subhash suicide case – बेंगलुरु में रहने वाले 34 वर्षीय अतुल सुभाष ने पत्नी और न्यायिक प्रक्रिया से तंग आकर आत्महत्या कर ली। इस दुखद घटना से पहले अतुल ने 40 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा और डेढ़ घंटे का वीडियो बनाया, जिसमें उन्होंने अपनी मानसिक पीड़ा और संघर्ष को बयां किया।

क्या है मामला?

अतुल सुभाष की शादी उत्तर प्रदेश के जौनपुर की निकिता सिंघानिया से हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन निकिता अचानक बेंगलुरु से जौनपुर लौट आई और अपने पति और ससुरालवालों के खिलाफ घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए 9 मामले दर्ज कर दिए।

झूठे आरोप और कोर्ट का चक्कर

अतुल ने वीडियो में बताया कि पिछले दो सालों में उन्हें 120 बार कोर्ट की तारीखों का सामना करना पड़ा। 40 बार वह बेंगलुरु से जौनपुर गए और इस प्रक्रिया में उनकी सालाना 23 छुट्टियां खत्म हो गईं। उनके माता-पिता और भाई को भी लगातार कोर्ट का चक्कर काटना पड़ा।

साजिश और प्रताड़ना
  • सुसाइड नोट के अनुसार, निकिता ने अतुल और उनके परिवार पर झूठे आरोप लगाए, जैसे कि 2019 में 10 लाख रुपये दहेज मांगने के कारण उनके पिता की मौत हुई। क्रॉस एग्जामिनेशन में यह साबित हुआ कि मौत का कारण दिल की बीमारी थी।
  • निकिता ने तलाक के बदले हर महीने दो लाख रुपये गुजारा भत्ता मांगा और अपने बच्चे से मिलने तक नहीं दिया।
न्याय व्यवस्था पर सवाल

अतुल ने जौनपुर के फैमिली कोर्ट के जज और पेशकार पर घूस मांगने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बिना घूस दिए मामले में अनुकूल आदेश नहीं मिलते। जब उन्होंने जज से अपनी पत्नी द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने की बात कही, तो जज ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

आखिरी शब्द

अतुल ने सुसाइड नोट और वीडियो में अपनी पत्नी से अपील की कि उनके बच्चे को उनके माता-पिता के पास भेजा जाए। उन्होंने अपने भाई को हिदायत दी कि निकिता और उसके परिवार से मिलने पर सबूत रिकॉर्ड करें। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी अस्थियां तभी विसर्जित हों जब दोषियों को सजा मिले।

समाज और न्यायिक व्यवस्था पर असर

यह घटना समाज और न्यायिक व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े करती है। अतुल की आत्महत्या यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या झूठे आरोपों और न्यायिक प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण लोग अपने जीवन को समाप्त करने के लिए मजबूर हो रहे हैं?

अतुल की कहानी न्याय और परिवारिक विवादों में फंसे अन्य लोगों के लिए एक चेतावनी है। यह मामला निष्पक्ष जांच और सुधार की मांग करता है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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