Shahdol News – परमधर्म सांसद श्रीधर शर्मा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि ज्योतिष पीठाधीश्वर अनंत विभूषित स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मुहिम छेड़ी थी। इस उद्देश्य के लिए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर प्रयास किए हैं। उन्होंने सरकार को अंतिम अवसर प्रदान किया था कि 17 मार्च तक गाय को राष्ट्रमाता घोषित कर सनातनी हिंदुओं की आध्यात्मिकता का सम्मान किया जाए।
हमारे देश के करोड़ों सनातनी हिंदुओं के द्वारा माता के रूप में पूजी जाने वाली गौमाता को पशु कहकर उद्बोधित करना हमारी मातृ आस्था का अपमान
परमधर्म सांसद श्रीधर शर्मा ने बताया कि सनातन धर्म के वेद, उपनिषद, पुराणों सहित समस्त धर्म ग्रंथों में गाय की महिमा का विस्तार से उल्लेख किया गया है। सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है और यह हिंदू समाज की धार्मिक आस्था से गहराई से जुड़ी हुई है। इसी धार्मिक आस्था के चलते संविधान एवं कानून में गाय को राज्य सूची से हटाकर केंद्रीय सूची में डालने और गौहत्या मुक्त भारत बनाने हेतु गौ प्रतिष्ठा आंदोलन लंबे समय से चलाया जा रहा है।
स्वतंत्रता के बाद से गौ माता की रक्षा एवं प्रतिष्ठा के लिए विभिन्न आंदोलन हुए हैं, जिनमें 1966 में धर्म सम्राट यतिचक्रचूड़ामणि पूज्य करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में गौरक्षा आंदोलन शामिल है, जिसमें हजारों गौभक्तों ने बलिदान दिया था। इसी कड़ी में, पूज्य गोपालमणि जी ने गौ प्रतिष्ठा आंदोलन का नेतृत्व करते हुए इसे देशव्यापी अभियान बनाया। चारों पीठों के जगद्गुरु शंकराचार्यों का इस अभियान को पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त है।
17 मार्च को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अनंत विभूषित स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी की अगुवाई में दिल्ली के रामलीला मैदान में होगा धरना प्रदर्शन
गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने एवं गौहत्या बंदी कानून के लिए देश में गौ संसद का आयोजन किया गया, जिसमें रामा गौ प्रतिष्ठा संहिता बिल सहित 42 बिंदुओं का धर्मादेश पारित किया गया। इस आंदोलन को और अधिक सशक्त करने हेतु पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने 14 से 28 मार्च 2024 तक नंगे पैर गोवर्धन से दिल्ली तक पदयात्रा की। उनके निर्देशन में गौ प्रतिष्ठा का अभियान पूरे देश में निरंतर गतिमान है। उन्होंने इस संवत्सर को ‘गौ संवत्सर’ के रूप में घोषित किया है।
स्वामी जी ने सरकार के समक्ष गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने का रखा था प्रस्ताव, 17 मार्च को स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने दिया था अंतिम अवसर
गौ प्रतिष्ठा आंदोलन के तहत ‘गो ध्वज स्थापना भारत यात्रा’ 22 सितंबर से 26 अक्टूबर 2024 तक आयोजित की गई थी, जो भारत के सभी राज्यों की राजधानियों तक पहुंची। इस यात्रा का उद्देश्य समस्त राष्ट्र के गोभक्त हिंदुओं को जागरूक करना और गौ हत्या के कलंक को समाप्त कर गौ माता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाना था। इस यात्रा के संयोजक पूज्य गोपाल मणि जी महाराज भी पूरी निष्ठा से इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में सक्रिय रहे।
परमधर्म सांसद श्रीधर शर्मा ने बताया कि स्वामी जी की इस राष्ट्रव्यापी मुहिम में करोड़ों सनातनियों की आस्था जुड़ी हुई है। पूरे भारत में सनातन धर्म और संस्कृति के अनुयायी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ने अपनी गुरु परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जो संकल्प लिया है, वह सनातनियों की आस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका यह प्रयास गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित कराने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।


