पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में फर्जी दस्तावेजों के जरिए नाम दर्ज कराने वाले विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से बांग्लादेशियों, की तलाश में पुलिस जुट गई है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पुलिस को ऐसे कुछ विदेशी नागरिकों के नाम मिले हैं, जिनके लिए नकली भारतीय पहचान पत्र जैसे कि मतदाता पहचान पत्र (EPIC), आधार कार्ड, और भारतीय पासपोर्ट तैयार किए गए थे। यह सब अज़ाद मुल्लिक नामक पाकिस्तानी नागरिक द्वारा किया गया, जिसे हाल ही में कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया।
कौन है अज़ाद मुल्लिक?
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मूल रूप से पाकिस्तानी नागरिक, फिर बांग्लादेशी नागरिकता हासिल की, और फिर नकली दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिक बना।
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वह उत्तर 24 परगना जिले के दुमदुम-उत्तर विधानसभा क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता था।
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उसने 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान भी किया।
यह सिर्फ एक मामला नहीं:
जांच में सामने आया है कि अज़ाद मुल्लिक अकेला नहीं है—और भी कई अवैध घुसपैठियों ने इसी तरह फर्जी भारतीय नागरिकता हासिल की है और चुनावों में वोट डाल चुके हैं।
कैसे चलता है यह रैकेट?
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अवैध घुसपैठिए भारत में प्रवेश करने के बाद स्थानीय एजेंटों से संपर्क करते हैं।
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पहले उन्हें सीमा से सटे गांवों में सुरक्षित आश्रय दिया जाता है।
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फिर एजेंट फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और फर्जी राशन कार्ड बनवाते हैं।
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इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे EPIC कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, और अंत में पासपोर्ट तैयार कर दिए जाते हैं।
कौन-कौन शामिल?
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एजेंट्स की भूमिका अस्पतालों, ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं, और खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग में सक्रिय नेटवर्क के रूप में पाई गई है।
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ये एजेंट भारी रकम लेकर दस्तावेजों की व्यवस्था करते हैं।
पुलिस ने इस पूरे रैकेट की एक विशेष कार्यप्रणाली (pattern) को पहचाना है और अब इससे जुड़े संपूर्ण नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रही है।


