July 28, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीयक्राइम

केरल की नर्स को फांसी से बचाने के लिए यमन में अंतिम समय पर जारी है हलचलभरी बातचीत

केरल की नर्स निमिषा प्रिया की यमन में तय समय पर होने वाली फांसी से कुछ ही घंटे पहले, उसे बचाने के लिए अंतिम समय पर तेज़ी से बातचीत और प्रयास जारी हैं।

निमिषा प्रिया इस समय यमन की एक जेल में बंद हैं। उन पर 2017 में अपने पूर्व बिजनेस पार्टनर तालाल अब्दो मेहदी की हत्या का आरोप है, जिसके लिए उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया है।

इस मामले में यमन की अदालत के स्थानीय मुख्य न्यायाधीश, प्रभावशाली शूरा काउंसिल के एक वरिष्ठ धर्मगुरु और मेहदी के परिवार के सदस्य बातचीत में शामिल हैं।

पालक्काड में स्थित निमिषा के गांव की पंचायत के एक सदस्य के अनुसार, यह उम्मीद जताई जा रही है कि मेहदी का परिवार ‘ब्लड मनी’ (रक्त धन) स्वीकार कर लेगा — जो इस्लामी कानून के तहत एक प्रावधान है। अगर ऐसा होता है तो बुधवार को होने वाली फांसी टल सकती है या रद्द हो सकती है।

केरल के राज्यपाल राजेन्द्र वी. अर्लेकर ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से बातचीत की है।

केरल के मशहूर उद्योगपति एम. ए. यूसुफ अली ने भी कहा है कि वे इस प्रयास में वित्तीय सहयोग देने के लिए तैयार हैं।

इस पहल को और गति मिली जब केरल के ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम ए.पी. अबूबकर मुस्लियार ने यमन की शूरा काउंसिल में अपने एक मित्र से मदद करने का आग्रह किया।

फांसी की तारीख घोषित होने के बाद से केरल में सभी राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार और भारत के राष्ट्रपति से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है। निमिषा के पति टोमी थॉमस और उनकी छोटी बेटी भी उनकी रिहाई के लिए लगातार मुहिम चला रहे हैं।

यह मामला सोमवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा, जहां अदालत ने कहा कि इस स्थिति में भारत सरकार के पास ज्यादा कुछ करने का अधिकार नहीं है।

निमिषा प्रिया 2008 में अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए यमन गई थीं। उन्होंने पहले एक नर्स के रूप में काम किया और फिर वहां खुद की एक क्लिनिक खोली। 2017 में अपने बिजनेस पार्टनर मेहदी से विवाद के बाद उन्होंने कथित रूप से उसे बेहोश करने के लिए नशीली दवा दी ताकि वह अपना जब्त पासपोर्ट वापस ले सकें। लेकिन यह दवा घातक सिद्ध हुई।

भागने की कोशिश करते समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 2018 में उन्हें हत्या का दोषी ठहराया गया। 2020 में उन्हें मौत की सज़ा दी गई, जिसे यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने नवंबर 2023 में बरकरार रखा। हालांकि अदालत ने ‘ब्लड मनी’ के ज़रिए क्षमा की संभावना खुली छोड़ी थी।

यह मामला राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है और यह संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय प्रवासी श्रमिकों की असुरक्षा को उजागर करता है। निमिषा की मां प्रेमा कुमारी इस मुहिम की प्रमुख चेहरा हैं। उन्होंने खुद सना (यमन की राजधानी) जाकर पीड़ित परिवार से बातचीत की कोशिश की है।

उन्हें ‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ के तहत कार्यरत एनआरआई कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों का समर्थन प्राप्त है।

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