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May 29, 2026
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“छोटे-छोटे मतभेद रहे, लेकिन कांग्रेस की विचारधारा के लिए साथ लड़े” : कमल नाथ से मुलाकात के बाद दिग्विजय सिंह

भोपाल, 12 सितम्बर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमल नाथ से मुलाकात की और 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने को लेकर दोनों दिग्गज नेताओं के बीच चले विवाद के बाद एक बंद कमरे में बैठक की।

उन्होंने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“कमल नाथ जी और मेरे बीच लगभग 50 वर्षों से पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। हमारी राजनीतिक यात्रा में उतार-चढ़ाव आए हैं, जो स्वाभाविक है। अपने पूरे करियर में हम कांग्रेस पार्टी में एकजुट रहे हैं, वैचारिक लड़ाइयाँ साथ लड़ी हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे बीच मामूली मतभेद जरूर रहे हैं, लेकिन दिल में कभी कोई खटास नहीं रही।

“हम कल मिले थे। हमें कांग्रेस नेतृत्व से भरपूर अवसर मिले हैं और जनता का स्नेह भी मिलता रहा है। आगे भी कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में हम जनता की सेवा करते रहेंगे,” पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा।

हालांकि, कमल नाथ ने दिग्विजय सिंह से हुई मुलाकात को लेकर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है।

पिछले महीने एक इंटरव्यू में दिग्विजय सिंह ने कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो अब भाजपा में केंद्रीय मंत्री हैं, की तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ से कुछ व्यक्तिगत नाराजगी थी, जिसके चलते कांग्रेस सरकार गिरी थी।

“मुझ पर अक्सर 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि मैंने सरकार बचाने के लिए लगातार प्रयास किए। मैंने समय रहते ऐसे संकट (सरकार गिरने) की आशंका के बारे में चेतावनी भी दी थी। यह कोई वैचारिक टकराव नहीं था, बल्कि व्यक्तित्व का टकराव था (नाथ और सिंधिया के बीच),” दिग्विजय सिंह ने कहा था।

दिग्विजय सिंह के इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कमल नाथ ने कहा था,
“मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि पुराने मामलों को कुरेदने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन यह सच है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के अलावा, ज्योतिरादित्य सिंधिया को लगता था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। इसी नाराजगी में उन्होंने कांग्रेस विधायकों को तोड़ दिया और हमारी सरकार गिरा दी।”

गौरतलब है कि दिसंबर 2018 में पूर्व केंद्रीय मंत्री और तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के नेतृत्व में 15 साल बाद कांग्रेस मध्य प्रदेश में सत्ता में लौटी थी।

हालांकि, यह सरकार 15 महीने ही टिक पाई। सात विधायकों – चार निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा के समर्थन पर टिकी यह सरकार तब गिर गई जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के वफादार 22 कांग्रेस विधायकों ने पार्टी और विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया।

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