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May 30, 2026
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इमरजेंसी फंड क्या होता है, आखिर हर किसी के लिए क्यों है जरूरी



मुंबई, 8 जनवरी । आज के दौर में जब नौकरी, बिजनेस और आमदनी किसी भी समय प्रभावित हो सकती है। ऐसे में ‘इमरजेंसी फंड’ हर व्यक्ति की वित्तीय जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। यह ऐसा फंड होता है जो अचानक आने वाली आर्थिक परेशानियों में आपको कर्ज लेने या निवेश तोड़ने से बचाता है। 

इमरजेंसी फंड वह राशि होती है, जिसे खास तौर पर आपात परिस्थितियों के लिए अलग रखकर जमा किया जाता है। जैसे अचानक नौकरी चली जाना, मेडिकल इमरजेंसी, परिवार में कोई बड़ा खर्च, या बिज़नेस में घाटा। यह पैसा आपके रोजमर्रा के खर्च या निवेश के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ संकट के समय के लिए होता है।

जानकारों का कहना है कि जिंदगी में अनिश्चितताएं कभी भी सामने आ सकती हैं। अगर आपके पास इमरजेंसी फंड नहीं है, तो ऐसे समय में आपको क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन या दोस्तों-रिश्तेदारों से मदद लेनी पड़ सकती है। इससे न सिर्फ आपकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। वहीं इमरजेंसी फंड आपको आत्मनिर्भर बनाता है और यह भरोसा देता है कि मुश्किल समय में आपके पास तुरंत उपलब्ध पैसा है।

मेडिकल खर्च आज बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। हेल्थ इंश्योरेंस के बावजूद कई बार जेब से खर्च करना पड़ता है। इसी तरह नौकरीपेशा लोगों के लिए जॉब लॉस, फ्रीलांसर या बिजनेस करने वालों के लिए इनकम रुक जाना बड़ी चुनौती बन सकता है। इन सभी हालात में इमरजेंसी फंड आपकी पहली ढाल बनता है।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इमरजेंसी फंड बनाना मुश्किल नहीं है, बस इसके लिए अनुशासन चाहिए। सबसे पहले अपने महीने के जरूरी खर्चों की लिस्ट बनाएं, जैसे किराया, राशन, बिजली-पानी, स्कूल फीस और ईएमआई। इसके बाद तय करें कि हर महीने अपनी इनकम का एक हिस्सा, चाहे छोटा ही क्यों न हो, अलग रखेंगे। आप चाहें तो सैलरी आते ही यह रकम अलग खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं। शुरुआत में छोटी रकम से शुरू करें और धीरे-धीरे इसे बढ़ाते जाएं।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इमरजेंसी फंड ऐसी जगह होना चाहिए जहां से पैसा तुरंत निकाला जा सके और जोखिम भी न हो। इसके लिए सेविंग अकाउंट, लिक्विड म्यूचुअल फंड या शॉर्ट-टर्म फिक्स्ड डिपॉज़िट अच्छे विकल्प माने जाते हैं। शेयर बाजार या लंबी अवधि के निवेश इसके लिए सही नहीं होते।

आम तौर पर वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इमरजेंसी फंड आपके कम से कम 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर होना चाहिए। अगर आपकी नौकरी या आमदनी स्थिर नहीं है, तो यह रकम 9 से 12 महीने के खर्च तक भी रखी जा सकती है।

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