July 28, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

झारखंड : गुमला में गुमशुदा बच्ची का आठ साल बाद भी नहीं चला पता, हाईकोर्ट ने गृह सचिव को किया तलब

रांची, 21 जनवरी  झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले से वर्ष 2018 से लापता छह वर्षीय बच्ची की मां की हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य में बच्चों की तस्करी, घुमंतू समुदायों की निगरानी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आठ साल बीत जाने के बावजूद बच्ची का कोई सुराग नहीं लग पाने पर अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया है।

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेशानुसार गुमला के एसपी अदालत में उपस्थित हुए। एसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी ने दिल्ली जाकर बच्ची की तलाश से जुड़े सुराग जुटाने की कोशिश की और उसकी तस्वीरें विभिन्न स्थानों पर प्रसारित कराई गई हैं,

हालांकि अब तक बच्ची बरामद नहीं हो सकी है। अदालत ने अगली सुनवाई 27 जनवरी को निर्धारित करते हुए गृह सचिव को ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हाल में बच्चों के अपहरण के मामले में गुलगुलिया गिरोह की अंतर्लिप्तता उजागर होने के घटनाक्रम पर मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि झारखंड में राजस्थान सहित अन्य राज्यों से आने वाले घुमंतू लोगों के लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। अदालत ने कहा कि ये लोग जगह-जगह टेंट लगाकर रहते हैं, लेकिन न तो पुलिस इनके आधार कार्ड या पहचान की जांच करती है और न ही राज्य सरकार ने इनके लिए कोई ठोस नियम बनाए हैं। कोर्ट ने आशंका जताई कि कई बार ऐसे समूह आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल पाए जाते हैं

, ऐसे में इन पर निगरानी के लिए ठोस गाइडलाइन बनाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य में बच्चों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है, जिस पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जरूरत है। यह मामला गुमला जिले की बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन द्वारा सितंबर 2018 में दायर हैबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है। बच्ची के लापता होने के बाद परिजनों ने पुलिस से कई बार गुहार लगाई, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो मामला अदालत तक पहुंचा। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों की तस्करी और लापता मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और राज्य सरकार को इस दिशा में ठोस नीति और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

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