April 8, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय

बांग्लादेश ने 77वें गणतंत्र दिवस पर भारत को दी शुभकामनाएं



नई दिल्ली, 26 जनवरी  भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। ऐसे मौके पर दुनिया के कई देशों ने भारत को शुभकामनाएं दी हैं। इन देशों की लिस्ट में एक नाम बांग्लादेश का भी है। हाल के समय में भारत और बांग्लादेश के संबंध काफी नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में बांग्लादेश ने भारत सरकार और लोगों को दिल से बधाई और शुभकामनाएं दीं, और दोनों पड़ोसी देशों के बीच दोस्ती और सहयोग की भावना को फिर से पक्का किया।

भारत में बांग्लादेश के हाई कमिश्नर, रियाज हमीदुल्लाह ने एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा था, “बांग्लादेश 77वें गणतंत्र दिवस पर भारत में हर महिला-पुरुष-बच्चे को बधाई देता है।” खास बात यह है कि भारत में बांग्लादेश के हाई कमिश्नर ने गणतंत्र दिवस की यह बधाई 14 भाषाओं में दी है।

इससे पहले शनिवार को, बांग्लादेश में भारतीय हाई कमीशन ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर ढाका में एक रिसेप्शन रखा। इस इवेंट में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के पावर, एनर्जी और मिनरल रिसोर्स के सलाहकार मुहम्मद फौजुल कबीर खान चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए। इस इवेंट में बोलते हुए, बांग्लादेश में भारतीय हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा ने एक डेमोक्रेटिक, स्टेबल, शांतिपूर्ण, प्रोग्रेसिव और इनक्लूसिव बांग्लादेश के लिए भारत के सपोर्ट पर ध्यान दिया।

पिछले महीने, भारत में बांग्लादेश के हाई कमिश्नर ने बांग्लादेश-भारत के रिश्तों को और गहरा करने की गुंजाइश पर जोर दिया, जो साझा हितों, प्रैक्टिकल सोच और आपसी निर्भरता से निर्देशित है। यह बयान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बांग्लादेश की कुछ घंटे की यात्रा से वापस लौटने के बाद आया था।

चार घंटे के दौरे में ईएएम जयशंकर और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के प्रमुख तारिक रहमान के बीच एक छोटी सी मुलाकात में रिश्तों के आगे के रास्ते पर चर्चा हुई।

हमीदुल्लाह ने एक्स पर पोस्ट किया था, “जब डॉ. एस. जयशंकर 4 घंटे के दौरे के बाद ढाका से निकले, तो बांग्लादेश और भारत प्रैक्टिकल सोच और आपसी निर्भरता से प्रेरित साझा हितों में बांग्लादेश-भारत के रिश्तों में एक नया चैप्टर लिखने की उम्मीद करेंगे, जैसा कि आज दोपहर बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान के साथ थोड़ी देर चर्चा हुई।”

बता दें, बांग्लादेश के उदय से लेकर वर्तमान के इतिहास में भारत सबसे अहम पहलू है। भारत की वजह से बांग्लादेश पाकिस्तान के चंगुल से खुद को आजाद कर पाया था। 1971 में भारत और पाकिस्तान की लड़ाई के बाद ही बांग्लादेश खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित कर पाया।

बावजूद इसके, शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद, जब से मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली है, तब से भारत को लेकर कई बार प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं को प्रतिदिन हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। देश में कट्टरपंथी उग्रवादियों की गतिविधि में तेज रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है।

इन कट्टरपंथियों के निशाने पर न केवल अल्पसंख्यक हिंदू हैं, बल्कि वहां काम कर रहे भारतीय राजनयिक और अधिकारी भी हैं। इसका ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब कट्टरपंथी उग्रवादियों का झुंड ढाका में भारतीय दूतावास का घेराव करने के लिए आगे बढ़ा। हालात ये हुए कि भारत को कई जगहों पर अपने वीजा सेंटर की सेवा कुछ समय के लिए बंद करनी पड़ी।

भारत ने बांग्लादेश के नागरिकों के लिए वीजा सर्विस पर भी रोक लगाई। इसके जवाब में बांग्लादेश ने भी ऐसा कदम उठाया। वहीं बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर भारत ने गंभीर चिंता जाहिर की। इसके साथ ही 12 फरवरी को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के आयोजन की उम्मीद जताई है।

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