September 13, 2026
सी टाइम्स
क्राइमप्रादेशिक

4 करोड़ से अधिक की आर्थिक क्षति और 20 लाख के गबन मामले में तत्कालीन सहकारी निरीक्षक के खिलाफ 3500 पन्नों का चालान पेश

रायपुर, 24 जून । सहकारी गृह निर्माण समितियों को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने और 20 लाख रुपये से अधिक के गबन के आरोप में तत्कालीन वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक (परिसमापक) राजकुमार नायडू के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने विशेष न्यायालय में 3500 पन्नों का चालान पेश किया है। मामले की जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बडिय़ों का खुलासा हुआ है।जानकारी के अनुसार, राजकुमार नायडू के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(सी)(डी) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। विस्तृत विवेचना के बाद एसीबी ने विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
जांच में सामने आया कि भैरव गृह निर्माण समिति एवं राष्ट्रीय खनिज विकास निगम गृह निर्माण समिति रायपुर में परिसमापक के रूप में पदस्थ रहते हुए राजकुमार नायडू ने निर्धारित प्रक्रिया और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कई अनियमित कार्य किए। आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रीय खनिज विकास निगम गृह निर्माण समिति के सदस्यों को आबंटित एवं पंजीकृत 13 भूखंडों का पंजीयन निरस्त करवा दिया और नए सदस्य बनाकर उन्हें कलेक्टर दर से कम कीमत पर अवैध रूप से बेच दिया।इसके अलावा समिति के रोड और रास्तों के लिए आरक्षित भूमि का भी नियमों के विपरीत विक्रय कर समिति को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
भैरव गृह निर्माण समिति में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

जांच के अनुसार, एक ही परिवार के तीन सदस्यों को नियमों के विरुद्ध भूखंड आबंटित कर उनका पंजीयन कराया गया। वहीं एक सदस्य को भूखंड आवंटित कर उसकी विक्रय राशि प्राप्त करने के बाद बिना सूचना दिए उसी भूखंड का पंजीयन किसी अन्य नए सदस्य के नाम करा दिया गया।एसीबी की जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी ने भूखंडों की बिक्री से प्राप्त राशि तथा निलंबन के बाद भी समिति के बैंक खातों से निकाली गई रकम का निजी उपयोग किया। इस तरह आरोपी द्वारा 20 लाख रुपये से अधिक का गबन किए जाने के साक्ष्य मिले हैं।विवेचना में सामने आया कि राजकुमार नायडू के कृत्यों के कारण दोनों सहकारी समितियों को कुल मिलाकर 4 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति हुई। साथ ही समिति के बैंक खातों से 20 लाख रुपये से अधिक की राशि का गबन कर निजी उपयोग किए जाने की पुष्टि हुई है।मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत 3500 पन्नों के चालान के आधार पर अब विशेष न्यायालय में आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।

 

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