सिवनी- जिले के लिए गर्व की बात है कि विश्वप्रसिद्ध सिवनी जम्बो सीताफल को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हो गया है। इससे सिवनी के सीताफल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विशिष्ट पहचान मिलेगी तथा किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
सिवनी जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार, उत्कृष्ट गुणवत्ता और प्राकृतिक मिठास के लिए जाना जाता है। इसका वजन सामान्यतः 200 से 650 ग्राम तक होता है, जबकि भूतबंधानी क्षेत्र में कई फल 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक पाए जाते हैं। GI टैग मिलने से इस उत्पाद की विशिष्टता सुरक्षित रहेगी और अन्य क्षेत्रों में इसके नाम के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा वर्ष 2023 में भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के माध्यम से GI टैग के लिए आवेदन किया गया था। अब इस उपलब्धि से जिले के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। वर्तमान में सिवनी जिले में लगभग 695 हेक्टेयर क्षेत्र में सीताफल की खेती होती है और प्रतिवर्ष करीब 6090 मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है।
जिले का सीताफल दिल्ली, मुंबई, नागपुर, रायपुर और वाराणसी सहित कई बड़े बाजारों में अपनी खास मांग रखता है। साथ ही इसके प्रसंस्करण से आइसक्रीम, रबड़ी, शेक, लस्सी एवं अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। जिले में दो एफपीओ तथा तीन सीताफल पल्प प्रसंस्करण इकाइयाँ भी संचालित हैं।
इस उपलब्धि पर कलेक्टर नेहा मीना, जिला उद्यानिकी अधिकारी डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार तथा जिला प्रशासन ने किसानों को बधाई दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि GI टैग से सिवनी जम्बो सीताफल को देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
साथ ही इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान की सफलता से भी जोड़ा जा रहा है। शीतकालीन सत्र 2025 में संसद में सिवनी जम्बो सीताफल को GI टैग दिलाने की मांग उठाई गई थी, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है।
यह GI टैग सिवनी की कृषि विरासत को नई पहचान देने के साथ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।


