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September 10, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

महाराष्ट्र में 2025 में 41 बाघों की हुई मौत : मंत्री गणेश नाइक



मुंबई, 13 मार्च )। महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को राज्य विधान परिषद को बताया कि वर्ष 2025 में देश में 166 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से 41 बाघों की मौत राज्य में हुई।

निर्दलीय विधायक सत्यजीत तांबे और अन्य सदस्‍यों ने वर्ष 2025 में महाराष्ट्र में बाघों की मौत और राज्य सरकार द्वारा इन मौतों को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर सवाल उठाए थे।

प्रदेश के वन मंत्री गणेश नाइक ने लिखित जवाब में कहा कि देश में बाघों की हुई 166 मौतों में से 41 मौतें महाराष्ट्र में वर्ष 2025 में हुई। 7 जनवरी, 2026 को एक बाघ का बच्चा मृत पाया गया और प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि उसकी मौत बाघों के बीच हुई लड़ाई के कारण हुई थी।

इसी प्रकार, एक और शावक का सड़ा हुआ शव मिला। प्रथम दृष्टया, यह मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई प्रतीत होती है।

मंत्री नाइक ने कहा, “विशेष बाघ संरक्षण बल (एसटीपीएफ) की टीमें अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त करती हैं। इसके अलावा, खोजी कुत्तों की टुकड़ियों द्वारा शिकार गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए फील्ड स्टाफ को एम-स्ट्राइप्स सिस्टम से लैस मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं।”

बाघ संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर लागू किए जाने वाले उपायों में बाघों, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रणनीतियां शामिल हैं, जिन्हें जिला स्तरीय बाघ समिति की बैठकों के दौरान तैयार किया जाता है।

मंत्री ने कहा, “शिकारियों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में मुखबिर नियुक्त किए गए हैं और प्राप्त जानकारी के आधार पर कार्रवाई की जाती है। इसके लिए गुप्त सेवा निधि का उपयोग किया जाता है। अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में वायरलेस संचार प्रणाली सक्रिय कर दी गई है।”

मंत्री गणेश नाइक ने अपने जवाब में कहा कि आवश्यक वन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए सुरक्षा झोपड़ियों और निगरानी टावरों का निर्माण किया गया है। उन्‍होंने कहा, “राज्य में वन्यजीव अपराधों की अद्यतन जानकारी बनाए रखने के लिए नागपुर के प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में एक वन्यजीव अपराध प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है और इसे वर्तमान में सुदृढ़ किया जा रहा है।

इसके अलावा, मेलघाट टाइगर प्रोजेक्ट में स्थापित साइबर प्रकोष्ठ का उपयोग शिकार की घटनाओं में शामिल आरोपियों का पता लगाने के लिए किया जाता है। अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक स्थानों पर चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं ताकि आने-जाने वाले वाहनों का नियमित निरीक्षण किया जा सके। बाघों और तेंदुओं की उपस्थिति पर नज़र रखने के लिए रेंज स्तर पर एक पाक्षिक ट्रैकिंग कार्यक्रम लागू किया गया है। गांवों के पास स्थित खानाबदोश बस्तियों का निरीक्षण उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता है।”

उन्होंने आगे कहा कि बाघों के गलियारों, जल निकायों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाकर संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखी जाती है। इसके अलावा, जहर के प्रसार को रोकने के लिए जल निकायों का नियमित रूप से निरीक्षण किया जाता है। यह सुनिश्चित करने के लिए मेटल डिटेक्टरों का भी उपयोग किया जाता है कि शिकारियों ने जल स्रोतों की ओर जाने वाले रास्तों पर लोहे के जाल न बिछाए हों।

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