_दीवारों पर बनाए ग्रह, मौसम और प्रकृति के चित्र_
उगली- सिवनी जिले के जनपद पंचायत केवलारी अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला खरपड़िया में शिक्षा के प्रति समर्पण और सामाजिक सहयोग की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। यहां स्कूल की दीवारों को आकर्षक और शिक्षाप्रद बनाने का सराहनीय कार्य साक्षी द्वारा पूरी तरह निःशुल्क किया गया है। साक्षी ने अपने श्रम और रचनात्मकता से स्कूल की दीवारों को सुंदर शैक्षणिक चित्रों से सजा दिया, इस कार्य में लगने वाला आर्थिक खर्च स्कूल प्रबंधन द्वारा उठाया गया। स्कूल की दीवारों पर ग्रहों, मौसम, प्रकृति, फूल, बादल और अन्य शैक्षणिक विषयों से जुड़े सुंदर और रंग-बिरंगे चित्र बनाए गए हैं। इन चित्रों के कारण स्कूल का वातावरण पहले की तुलना में अधिक आकर्षक, जीवंत और प्रेरणादायक बन गया है। अब छोटे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ चित्रों के माध्यम से विषयों को समझने में भी काफी आसानी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में अक्सर संसाधनों की कमी देखने को मिलती है। ऐसे में साक्षी की यह पहल न केवल सराहनीय है बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी है। स्कूल में बनी इन पेंटिंग्स से बच्चों में रचनात्मकता बढ़ेगी और वे उत्साह के साथ विद्यालय आने के लिए प्रेरित होंगे।
स्कूल की दीवारें भी बच्चों को शिक्षा का पाठ पढ़ा रही हैं———
साक्षी का कहना है कि प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों का समय उनके मस्तिष्क के विकास का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इस उम्र में बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जो रंगों, रचनात्मकता और उत्साह से भरा हो। एक रंगीन और सृजनात्मक कक्षा न केवल बच्चों को आकर्षित करती है बल्कि उनकी कल्पनाशक्ति और सोचने की क्षमता को भी विकसित करती है। उन्होंने बताया कि जब बच्चे अपने आसपास चार्ट, टीएलएम और विभिन्न शैक्षणिक सामग्री को लगातार देखते रहते हैं तो वे स्वाभाविक रूप से उनसे परिचित होने लगते हैं। कई सूत्र, शब्द और अवधारणाएँ बिना किसी दबाव के ही उनकी स्मृति में बैठ जाती हैं। इस प्रकार कक्षा का रचनात्मक और शिक्षण-समृद्ध वातावरण बच्चों को जिज्ञासु, रचनात्मक और आत्मविश्वासी शिक्षार्थी बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ग्रामीणों ने साक्षी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यदि समाज के लोग इसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करें तो सरकारी स्कूलों का माहौल और भी बेहतर बनाया जा सकता है। साक्षी की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि अब स्कूल की दीवारें भी बच्चों को शिक्षा का पाठ पढ़ा रही हैं।


